आयुर्वेद में ही संभव है रुमेटॉइड आर्थराइटिस का उपचार

by | Jan 11, 2020 | Arthritis, Ayurveda, Therapy | 0 comments

आर्थराइटिस आज एक बड़ी बीमारी के रूप में सामने आ रहा है। रुमेटॉइड आर्थराइटिस भी कुछ इसी तरह की बीमारी है। वास्तव में ये एक तरह का गठिया है। इससे समाज का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है। महिलाओं में इसका बढ़ता स्वरूप सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। भारतीय चिकित्साशास्त्र आयुर्वेद में इस बीमारी के बारे में विस्तार से ज़ानकारी और उपचार उपलब्ध है। किंतु आज भी स्थितियों के नियंत्रण से बाहर हो जाने के बाद ही लोग आयुर्वेद की ओर लौटते हैं। बेशक तब तक देर हो चुकी होती है। पर फिर भी वे आयुर्वेद से निराश नहीं होते और सुखमय जीवन का आनंद पाने में सफल होते हैं। गठिया का ये रोग जॉइंट पैन के रूप में सामने आता है। इस रोग में आयुर्वेद कैसे सहायक है बता रहे हैं डॉक्टर जीवन एच भागड़ीकर।

क्या है रुमेटॉइड आर्थराइटिस?

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान कहता है कि रुमेटॉइड आर्थराइटिस प्रतिरोधक प्रणाली की गलत कार्यविधि से होने वाली बीमारी है। इसे वह ऑटोइम्यून डिज़ीज़ मानता है। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली सहयोग करने के बजाय शरीर को हानि पहुंचाने का काम करती है। इस बीमारी में जॉइंट पैन के साथ जोड़ों की सूजन प्रमुखता से होती है। यह त्वचा, आंखों, फेफड़ों, ह्रदय, रक्त और नसों तक को प्रभावित करती है। हालांकि हर बार सब लक्षण हमेशा ही होते हों या सब अवयव एक साथ प्रभावित होते हों यह ज़रूरी नहीं होता है। परन्तु ये लक्षण आते-जाते रहते हैं।

रुमेटॉइड आर्थराइटिस के लक्षण

आमवात मतलब रुमेटॉइड आर्थराइटिस में जॉइंट पैन, सूजन और उसमें सामान्य से अधिक गर्माहट विशेषतौर पर होती है। रुमेटॉइड आर्थराइटिस के रोगियों में सुबह सोकर उठने पर जोड़ों की जकड़हाट शरीर के दोनों ओर एक सामान होते हैं। घुटनों, कोहनियों और कलाइयों पर इसे देखकर आसानी से समझा जा सकता है। इसके अलावा हल्का बुखार और अतिरिक्त थकावट का भी अनुभव इस रोग से पीड़ित रोगी करते हैं। ये सभी लक्षण कुछ ही रोगियों में एकाएक होते हैं अन्यथा इनका क्रमश: विकास होता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्तियों में हो सकता है

30 से 60 वर्ष की आयु में और विशेषकर महिलाओं में यह होता है। पुरुषों की अपेक्षा दुगुनी संख्या में महिलायें रुमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित होती हैं। अनुवांशिकता और संक्रमण का भी इस पर विशेष प्रभाव होता है।

रुमेटॉइड आर्थराइटिस क्यों होता है?

इसका सटीक उत्तर आज भी आधुनिक विज्ञान के पास नहीं है। वह आज भी जींस या कुछ विशेष अनुवांशिक कारकों को इसके लिए ज़िम्मेदार मानता है। कुछ विशिष्ठ परिस्थितयों में जींस की गड़बड़ी से कुछ विशेष प्रकार के संक्रमण इस बीमारी को पैदा करते हैं। आयुर्वेद में इसके लिए काफी कुछ कहा गया है। शरीर में आम का निर्माण और जोड़ों में इसका संचय इस व्याधि का कारक कहा गया है।

जोड़ों में होने वाली सूजन कुछ समय के बाद जोड़ों की झिल्लियों और हड्डियों को नष्ट करती है। प्रक्रिया में जोड़ अपना स्वभाविक स्वरूप खो देते हैं। इससे दर्द से परिपूर्ण होकर अपना कार्य करने में असमर्थ हो जाया करते हैं। रुमेटॉइड आर्थराइटिस का प्रभाव केवल जोड़ों पर होता है ऐसा नहीं है। इसी बात को आधुनिक विज्ञान भी स्वीकारता है। कम आयु के बच्चों में भी आमवात देखा जाता है। इसे जूवेनाइल रूमेटॉइड आर्थराइटिस कहा जाता है।

गठिया का एक प्रकार है आमवात

पुरुषों और महिलाओं में जिस तरह से गठिया रोग समस्या पैदा करता है, ठीक वैसा आमवात में होता है। गठिया भी जॉइंट पैन और इसी से जुड़ी अन्य तकलीफे देता है। साथ ही गठिया भी हड्डियों से जुड़ी एक बीमारी है। रुमेटॉइड आर्थराइटिस में भी लक्षण गठिया के समान ही होते हैं।

जॉइंट पैन कम करने की चिकित्सा उपयोगी है

आधुनिक विज्ञान का मानना है कि रुमेटॉइड आर्थराइटिस का कोई इलाज नहीं है। केवल लक्षणों और जॉइंट पैन और सूजन को कम करके जोड़ों को बचाने का उपक्रम किया जा सकता है। दवाओं से जोड़ों को काम करने वाली अवस्थाओं में रखा जा सकता है। दवाओं के साथ-साथ व्यायाम अत्यंत आवश्यक है। इसमें मांसपेशियों की लचक और जोड़ों की गतिविधियों को सामान्य बनाये रखने में मदद मिलती है। कुछ लोगों को शल्यक्रिया से लाभ मिलता है।

आमवात के रोगियों को खान-पान में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। हल्का, ताज़ा और सादा भोजन करना चाहिए।

अदरक, लहसुन, मेथी, जीरा खाया जा सकता है। आमवात की चिकित्सा में व्यायाम का बड़ा ही महत्व है। प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार प्रत्येक जोड़ का व्यायाम करें। जिम में अतिरिक्त वज़न उठाने से बचें। सूजे जोड़ों पर जिन व्यायामों से चोट लग सकती है उनसे बचें। व्यायाम ऐसा करें जो सहज हो, सुगम हो, सरल हो और मांसपेशियों और जोड़ों के लिए लाभदायक हो। पैदल चलना, साईकिल चलाना और तैरना यह आप अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते हैं। सदैव सक्रिय रहना इस बीमारी से बचाने में मददगार साबित होता है। आज पंचकर्म चिकित्सा का बोलबाला है। बेशक यह चिकित्सा शरीर की वृद्धि के लिए उत्तम है। औषधि, आहार, व्यायाम, जीवनशैली और उत्तम मन स्थिति के द्वारा आमवात पर विजय पाई जा सकती है इसमें कोई दो मत नहीं।

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आयुर्वेदा से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए हमारे थेरेपी और आर्थराइटिस से जुड़ी जानकारी के लिए हमारे हेल्थ A-Z सेक्शन को ज़रूर देखें। इसी तरह की अन्य जानकारी के लिए वामा टुडे के हेल्थ सेक्शन को भी ज़रूर विज़िट करें।

Dr. Jeevan H. Bhagdikar

Dr. Jeevan H. Bhagdikar

Arogyadeep Ayurveda