कार्यों की सिद्धि हेतु इस तरह से करें गुप्त नवरात्रि में उपासना

by | Jan 27, 2020 | Astrology | 0 comments

एस्ट्रोलॉजी को लेकर हमारे देश में अनेक तरह के विश्वास का प्रचलन है। वैसे ही हमारे देश में देवी को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत और त्यौहार मनाए जाते हैं। नवरात्रि भी इनमें से एक है। लेकिन लोग सिर्फ दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय) के बारे में ही जानते हैं। इनके अलावा दो और नवरात्रि भी होती हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ मास में आते हैं। इस बार माघ मास के गुप्त नवरात्र का प्रारंभ 25 जनवरी 2020 (शुक्रवार) से हो रहा है। यह 3 फरवरी, सोमवार को समाप्त होगी। शक्ति की उपासना करने वालों के लिए इस बार माघ मास की गुप्त नवरात्रि खास होगी। मालूम हो कि एक साल में चार बार नवरात्रि आती है। इनमें दो सामान्य और दो गुप्त होती हैं। चैत्र-आश्विन मास में सामान्य और माघ-आषाढ़ में गुप्त नवरात्रि आती है। माघ मास की गुप्त नवरात्र में वामाचार (तंत्र-मंत्र) पद्धति से उपासना की जाती है। यह समय शाक्त (महाकाली की पूजा) एवं शैव (शिव पूजा) करने वालों के लिए विशेष होता है। बहुत-से साधक इस समय दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं। ये नवरात्रि तंत्र साधना के लिए विशेष रूप से मानी जाती है।

क्यों विशेष है माघ की गुप्त नवरात्रि?

माघ मास की गुप्त नवरात्र में वामाचार (तंत्र-मंत्र) पद्धति से उपासना की जाती है। यह समय शाक्त (महाकाली की पूजा करने वाले) एवं शैव (शिव पूजा करने वाले) के लिए विशेष होता है। इस गुप्त नवरात्रि में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं की पूजा होती है। अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है। ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं। दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंच मकार (मद्य, शराब, मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस) की साधना भी इसी नवरात्रि में की जाती है।

जानिए कब-कब आती है गुप्त नवरात्रि?

हिंदू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है। इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्रि होती है। इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवें महीने में भी गुप्त नवरात्र मनाने का उल्लेख एवं विधान धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्र गुप्त रहती है। इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती। इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। गुप्त नवरात्र विशेषतौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। साधक इन दोनों गुप्त नवरात्र में विशेष साधना करते हैं और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त करते हैं।

गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के प्रयोग

महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है। इनमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। इस बार माघ महीने की गुप्त नवरात्रि 25 जनवरी से 3 फरवरी तक रहेगी। ब्रहदेव ने कहा कि जो मनुष्य् दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा। साथ ही उसे अनेक प्रकार की शक्ति प्राप्त होगी। नवरात्रि के दौरान श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ को अत्ययधिक महत्व्पूर्ण माना गया है। इस दुर्गा सप्तोशती को ही शतचंडी, नवचंडी अथवा चंडी पाठ भी कहते हैं। रामायण के दौरान लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान राम ने इसी दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन किया था।

हिन्दु धर्म की मान्यातानुसार दुर्गा सप्तगशती में कुल 700 श्लोक हैं। इनकी रचना स्व‍यं ब्रह्मा, विश्वाेमित्र और वशिष्ठ् द्वारा की गई है। और मां दुर्गा के संदर्भ में रचे गए इन 700 श्लोवकों की वजह से ही इस ग्रंथ का नाम दुर्गा सप्त्शती है। दुर्गा सप्तंशती मूलत: एक जाग्रत तंत्र विज्ञान है। यानी दुर्गा सप्तदशती के श्लोसकों का अच्छात या बुरा असर निश्चित रूप से होता है। साथ ही बहुत ही तीव्र गति से होता है। शक्ति की पूजा करके अनेक लोग अपने कार्यों को सिद्ध कर सकते हैं।

सिद्धि प्राप्ति के लिए किया जाता है दुर्गा सप्तशती का पाठ

दुर्गा सप्तपशती के सभी मंत्र बहुत ही प्रभावशाली हैं। इस ग्रंथ के मंत्रों का दुरूपयोग न हो, इस हेतु भगवान शंकर ने इस ग्रंथ को शापित कर रखा है। इस ग्रंथ को शापोद्धार विधि का प्रयोग करते हुए शाप मुक्‍त किया जाना ज़रूरी है। वर्ना इस ग्रंथ में लिखे किसी भी मंत्र से सिद्धि नहीं मिल सकती। यदि मंत्र जाग्रत न हो, तब तक उसे मारण, सम्मोकहन, उच्चा टन आदि के लिए उपयोग में नहीं लिया जा सकता। सिद्धि के लिए अनेक तांत्रिक, साधू इस मन्त्र का प्रयोग करते हैं।

शक्ति की उपासना का है विशेष महत्व

इस पर्व में शक्ति की पूजा मूल रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि मां की आराधना व्यक्ति को हर तरह की परेशानी से दूर रखती है। शक्ति के जागरण से इंसान की हर तरह की मनोकामना पूरी होती है।

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