धनु राशि में बृहस्पति का प्रवेश, इन राशियों पर डालेगा प्रभाव

by | Nov 5, 2019 | Astrology | 0 comments

एस्ट्रोलॉजी में अक्सर ग्रहों की चाल का असर देखने को मिलता है। देवगुरु बृहस्पति लगभग 12 वर्षों बाद पुनः 05 नवंबर 2019 को प्रातः धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ये एक सदी में लगभग आठ बार धनु राशि की परिक्रमा करते हैं। ऐसा होने पर कुंडली में अनेक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। कई राशियों के जातक को फाइनेंशियल प्रॉब्लम और हेल्थ प्रॉब्लम्स उठाना पड़ सकती है। लेकिन कुछ राशियों पर इसका अच्छा प्रभाव देखने को मिल सकता हैं।

कब से कब तक रहेगा बृहस्पति का भ्रमण?

बृहस्पति ग्रह 5 नवंबर 2019, मंगलवार रात 12 बजकर 3 मिनट पर धनु राशि में गोचर करेगा। 29 मार्च 2020, रविवार शाम को 7 बजकर 8 मिनट तक इसी राशि में स्थित रहेगा। गुरु के धनु राशि में गोचर करने से ‘हंस’ योग बनता है। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के भी स्वामी हैं। कर्क राशि इनकी उच्च और मकर राशि नीच संज्ञक कही गयी है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में बृहस्पति धनु राशि में होकर केन्द्र या त्रिकोण में होंगे उनके लिए ‘हंस’ योग श्रेष्ठतम फलदाई रहेगा।

किसी राशि में अच्छा तो किसी में बुरा होगा बृहस्पति का भ्रमण

गुरु एक राशि में करीब एक साल रहते हैं इसलिए 12 साल के बाद फिर से अपनी राशि धनु में लौटते हैं। 5 नवंबर को गुरु सुबह अपनी राशि धनु में लौट रहे हैं। अपनी राशि धनु में गुरु अगले साल 2020 मार्च तक रहेंगे। इस राशि में गुरु का स्वागत दो पाप ग्रह केतु और शनि करेंगे। शनि और केतु से साथ गुरु का संयोग यूं तो शुभ नहीं है फिर भी गोचर के अनुसार कुछ राशियों को इसका परिवर्तन शुभ लाभ होगा तो किसी को होगा नुकसान।

धनु राशि पर ये होंगे सकारात्मक प्रभाव

इसी राशि में बृहस्पति आ रहा है और यह लग्न यानी प्रथम स्थान है। यहां पर बृहस्पति के मार्गी होने से शारीरिक दिक्कतें दूर होंगी। सुख-सौभाग्य प्राप्त होगा। धन की तंगी दूर होने की स्थिति बनेगी और आय के एक से अधिक साधन प्राप्त होंगे। सेहत के लिहाज़ से यह गोचर अच्छा साबित होगा। बीमारियों पर हो रहे खर्च में कमी आएगी। जीवनसाथी के साथ पर्यटन का मौका आएगा। शत्रुओं को परास्त करने में कामयाब होंगे। सभी कार्य आपके मनोनुकूल होंगे।

ये बातें ध्यान रखना होगी धनु राशि के जातकों को

मानसिक द्वंद्व रहेगा, चोट व रोग से बचें। अपरिचितों पर विश्वास न करें, जल्दबाजी न करें। नई योजना बनेगी, नए कार्य प्रारंभ करने का मन बनेगा। व्यवसाय में अनुकूलता रहेगी, मित्रों के साथ अच्छा समय गुज़रेगा, प्रसन्नता रहेगी। मनोरंजन के अवसर मिलेंगे, भाग्य का साथ मिलेगा।

गुरु बृहस्पति का कुंडली पर प्रभाव

कुंडली में बृहस्पति की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मान सम्मान और ज्ञान प्रदान करती है। तथा व्यक्ति को धन की प्राप्ति भी अच्छी मात्रा में होती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी बृहस्पति की मज़बूत स्थिति को देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर गुरु बृहस्पति जब इसके विपरीत अवस्था में होते हैं तो इन सभी कारकों में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका अनेक जातकों की कुंडली पर असर देखा जा सकता है। जब-जब कोई गृह दूसरी राशि में प्रवेश करता है कुंडली पर भी इसका प्रभाव देखा जा सकता है।

वृषभ राशि वाले जातकों को हो सकती है फाइनेंशियल प्रॉब्लम

इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर अष्टम भाव में होगा। इससे कुछ फाइनेंशियल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ सकता है। सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा। पेट संबंधी रोग आ सकते हैं। अनचाही यात्राएं होंगी। आर्थिक पक्ष कमज़ोर रहेगा। धन संचय करने में परेशानी आ सकती है। कुल मिलाकर बड़ी फाइनेंशियल प्रॉब्लम हो सकती है। उधार चुकाने का दबाव रहेगा। व्यापार में मनचाहे परिणाम प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ेगी। धार्मिक कार्यों की ओर रूझान बढ़ेगा। फाइनेंशियल प्रॉब्लम को दूर करने के लिए पहले से ही प्रयास शुरू कर दें।

मिथुन राशि वाले जातकों को हो सकती है हेल्थ प्रॉब्लम्स

पुराना रोग उभर सकता है। चिंता तथा तनाव में वृद्धि होगी। हेल्थ प्रॉब्लम्स के कारण आपके काम पर भी इसका प्रभाव होगा। हेल्थ प्रॉब्लम्स से उबरने के लिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वैसे इस राशि पर गुरु का मिला-जुला प्रभाव रहेगा।

बृहस्पति ग्रह की शांति के कुछ उपाय

• ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति अनुकूल अवस्था में नहीं है तो आपको पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।

• बृहस्पति धनु और मीन राशियों के स्वामी हैं इसलिए अगर इन दोनों राशियों के जातक पुखराज धारण करें तो उन्हें शुभ फल मिलते हैं।

• इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह के अच्छे फल प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन या बृहस्पति की होरा में गुरु यंत्र को अपने घर में स्थापित करना चाहिए।

• आप गुरु ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पीपल की जड़ को गुरु की होरा या गुरु के नक्षत्रों में भी धारण कर सकते हैं।

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