अन्नदान में छिपा है ग्रहों की शांति का राज़

by | Feb 26, 2020 | Astrology | 0 comments

एस्ट्रोलॉजी में हर तरह के दान का बड़ा महत्व बताया गया है। इसी तरह से अन्नदान भी आपके अनेकी दुखों को दूर करने का तरीका हो सकता है। वैसे भी दान कोई-सा भी हो मन को ख़ुशी ही देता है। दान करने से आपके मन को तृप्ति मिलती है। यही नहीं ग्रह शांति के लिए भी दान के विशेष महत्व बताये गए हैं। चाहे वो शनि ग्रह हो या मंगल ग्रह आप अन्नदान से किसी की भी शांति कर सकते हैं। प्रख्यात ज्योतिष पंडित विशाल दयानंद शास्त्री इसी बारे में यहां जानकारी दे रहे हैं।

क्यों है अन्नदान का महत्व?

हमारे प्राचीन भारतीय शास्त्रों के अनुसार अगर इस संसार में कोई सबसे बड़ा दान है तो वह है अन्न दान। यह संसार अन्न से ही चलता है और अन्न की सहायता से ही इसकी रचनाओं का पालन हो रहा है। अन्न एकमात्र ऐसी वस्तु है जिससे शरीर के साथ-साथ आत्मा भी तृप्त होती है। इसीलिए कहा गया है कि अगर कुछ दान करना ही है तो अन्नदान करो। अन्नदान करने से बहुत लाभ होता है। सभी शास्त्रों में जितने दान और व्रत कहे गए हैं, उनकी तुलना में अन्नदान सबसे श्रेष्ठ है।

अन्न ही तेज, बल और सुख है। इसलिए अन्नदाता प्राणदाता है। भूखा व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के घर आशा करके जाता है और वहां से संतुष्ट होकर आता है। इससे भोजन देनेवाला व्यक्ति धन्य हो जाता है। दान करने से एक नहीं बल्कि दो व्यक्ति संतुष्ट होते हैं। एक व्यक्ति देकर संतुष्ट होता है और एक लेकर।

स्वास्थ्य और आयु के लिए अन्न और जल का दान करें

रोज़गार की प्राप्ति के लिए : प्रकाश का दान करें (तुलसी के नीचे या मंदिर में दीपक जलाएं)

शीघ्र विवाह के लिए : सुहाग की वस्तुओं का दान करें

मुकदमे में विजय के लिए : मीठी वस्तु (मिठाई) का दान करें

संतान प्राप्ति के लिए : वृक्ष लगाएं और नियमित जल दान करें (जल डालें)

दुर्घटना से रक्षा के लिए : काले तिल का दान करें

ग्रह शांति के लिए दान करें

जन्म कुण्डली में कुछ ग्रहों को मज़बूत एवं दुष्ट ग्रहों को शांत करने के लिए तो हम दान-पुण्य करते ही हैं। लेकिन ग्रहों की कैसी स्थिति में हमें कैसा दान नहीं करना चाहिए, यह भी जानने योग्य बात है। यदि आपके ग्रह शांति नहीं हो पाती है तो इससे स्वास्थ्य से जुड़े अनेक परेशानियां देखने को मिलती है। यही नहीं ग्रह शांति न होने से आपको घर और बाहर की भी अनेक तकलीफों का सामना करना पड़ता है।

सूर्य ग्रह के लिए क्या दान न करें

सूरज मेष राशि में होने पर उच्च तथा सिंह राशि में होने पर अपनी स्वराशि का होता है। यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य इन्हीं दो राशियों में से किसी एक में हो तो उसे लाल या गुलाबी रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा गुड़, आटा, गेहूं, तांबा आदि दान नहीं करना चाहिए। सूर्य की ऐसी स्थिति में ऐसे जातक को नमक कम करके, मीठे का सेवन अधिक करना चाहिए। सूर्य के निमित्त लाल चंदन, लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, घी व केसर का दान देना लाभप्रद होता है।

चंद्र ग्रह के लिए क्या दान न करें

चन्द्रमा वृष राशि में उच्च तथा कर्क राशि में अपनी राशि का होता है। यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में चंद्र ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे खाद्य पदार्थों में दूध, चावल एवं आभूषणों में चांदी एवं मोती का दान नहीं करना चाहिए। ऐसे जातक के लिए माता या अपने से बड़ी किसी भी स्त्री से दुर्व्यवहार करना हानिकारक हो सकता है। किसी स्त्री का अपमान करने पर ऐसे जातक मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। चंद्रमा के निमित्त चांदी, चावल, सफेद चंदन, शंख, कर्पूर, दही, मिश्री आदि का दान संध्या के समय में करना फलदाई है।

मंगल ग्रह के लिए क्या दान न करें

यदि मंगल ग्रह , मेष या वृश्चिक राशि में हो तो स्वराशि का तथा मकर राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में मंगल ग्रह ऐसी स्थिति में है तो, मसूर की दाल, मिष्ठान अथवा अन्य किसी मीठे खाद्य पदार्थ का दान ना करें। मंगल ग्रह के निमित्त गुड़, घी, लाल वस्त्र, कस्तूरी, केसर, मसूर की दाल, मूंगा, तांबे के बर्तन आदि का दान सूर्यास्त से पौन घंटे पूर्व करना चाहिए।

बुध ग्रह के लिए क्या दान न करें

जब बुध, मिथुन राशि में तो स्वराशि तथा कन्या राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि किसी जातक की जन्मपत्रिका में बुध उपरोक्त वर्णित किसी स्थिति में है तो, उसे हरे रंग के पदार्थ और वस्तुओं का दान कभी नहीं करना चाहिए। हरे रंग के वस्त्र, वस्तु और यहां तक कि हरे रंग के खाद्य पदार्थों का दान ऐसे जातक के लिए निषेध है। इसके अलावा इस जातक को न तो घर में मछलियां पालनी चाहिए और न ही स्वयं कभी मछलियों को कभी दाना डालना चाहिए। बुध के निमित्त सावधानीपूर्वक कांसे का पात्र, मूंग, फल आदि का दान करें।

बृहस्पति ग्रह के लिए क्या दान न करें

गुरु, जब धनु या मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा कर्क राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। जिस जातक की कुण्डली में बृहस्पति ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे पीले रंग के पदार्थ दान नहीं करना चाहिए। सोना, पीतल, केसर, धार्मिक साहित्य या वस्तुओं आदि का दान नहीं करना चाहिए। इन वस्तुओं का दान करने से समाज में सम्मान कम होता है। गुरु के निमित्त चने की दाल, धार्मिक पुस्तकें, पीले वस्त्र, हल्दी, केसर, पीले फल आदि का दान करना चाहिए।

ऐसे दान करें शुक्र ग्रह के लिए

शुक्र ग्रह, वृष या तुला राशि में हो स्वराशि का एवं मीन राशि में हो तो उच्च भाव का होता है। जिस जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह की ऐसी स्थिति हो, तो उसे श्वेत रंग के सुगन्धित पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए।अन्यथा व्यक्ति के भौतिक सुखों में कमी आने लगती है। इसके अलावा नई खरीदी गई वस्तुओं का एवं दही, मिश्री, मक्खन, शुद्ध घी, इलायची आदि का दान भी नहीं करना चाहिए। ध्यान रखें, शुक्र ग्रह के निमित्त चावल, मिश्री, दूध, दही, इत्र, सफेद चंदन आदि का दान सूर्योदय के समय करें।

शनि ग्रह के लिए इसे करें दान

जी हां शनि ग्रह यदि मकर या कुम्भ राशि में हो तो स्वगृही तथा तुला राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि आपकी कुण्डली में शनि ग्रह की स्थिति है तो आपको काले रंग के पदार्थों का दान कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लोहा, लकड़ी और फर्नीचर, तेल या तैलीय सामग्री, बिल्डिंग मैटीरियल आदि का दान नहीं करना चाहिए। शनि ग्रह के निमित्त लोहा, उड़द की दाल, सरसों का तेल, काले वस्त्र, जूते का दान करना चाहिए।

तो आप भी बताये गए तरीके के आधार पर ही दान करें, इससे आपको लाभ होगा। अन्नदान के महत्व पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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Pt. Vishal Dayanand Shastri

Pt. Vishal Dayanand Shastri

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ज्योतिषचार्य पंडित विशाल दयानंद शास्त्री