अधिक मास में यह काम चमका देंगे आपकी किस्मत

by | Sep 24, 2020 | Astrology | 0 comments

एस्ट्रोलॉजी का संबंध सितारों और नक्षत्रों की बदली हुई चाल से होता है। जैसे-जैसे समय का पहिया घूमता है वैसे ही हमारे जीवन के साथ-साथ दुनिया में भी परिवर्तन होने लगते हैं। अब यदि देखा जाए तो नक्षत्रों की बदली हुई चाल हमारे तीज और त्यौहारों पर भी असर डालते हैं। अब आप इस साल ही देख लीजिए अधिक मास के कारण सारे व्रत और त्यौहार एक महीना आगे बढ़ चुके हैं। अगर अधिक मास की बात की जाए इसके बारे में भी लोग बहुत कम जानते हैं। अधिक मास का मतलब है एक महीने का अतिरिक्त समय जो कि 3 साल के बाद चौथे साल ज़रूर आता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। क्योंकि यह समय पूरी तरह अपने आप को ईश्वर आराधना में संलग्न करने का होता है। इस दौरान दान-पुण्य का भी काफी महत्व होता है। यही नहीं यदि व्यक्ति अनेक समस्याओं से गुज़र रहा है तो इस दौरान किए जाने वाले उपाय और टोटके उसे अनेक परेशानियों से मुक्ति भी दिलाते हैं। इस लेख में आप ऐसे ही कुछ उपायों को जानेंगे जिससे आप की अनेक समस्याओं का समाधान होगा और आपकी किस्मत में एकदम से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। भोग में लगने वाली खीर और तुलसी पूजा भी अधिक मास में आपके अनेक कष्टों को हर सकते हैं।

जी हां सुनने में यह बात ज़रूर अजीब लग सकती है लेकिन सच्चाई यही है। अधिक मास या मल मास या फिर इसे खरमास के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान भागवत कथा का श्रवण या पठन दोनों ही व्यक्ति के लिए और उसके परिवार के लिए बहुत लाभकारी होता है। ईश्वर आराधना में आप जितना अधिक समय लगाएंगे और जितना परोपकारी कार्य करेंगे उतने ही लाभ आपको मलमास के दौरान मिलेंगे। धन संपदा ही नहीं बल्कि परिवार की खुशियां, यश प्राप्ति, संतान सुख और ऐसे ही अनेक लाभ या फल आपको मलमास के दौरान प्राप्त हो सकते। आइए इस बारे में आपको और जानकारी देते हैं।

क्या है अधिकमास?

जैसा कि विदित है अधिक मास को पुरुषोत्तम मास या मलमास के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा इसे खर मास भी कहा जाता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे की शादी ब्याह, ग्रह प्रवेश, मुंडन आदि नहीं होते। बल्कि यह समय अपने आप को पूरी तरह ईश्वर आराधना में संलग्न करने के लिए होता है। सांसारिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त होकर अधिकमास में अपने आपको ईश्वर आराधना में लगाना चाहिए और पुण्य कार्य करने चाहिए। अधिक मास 1 महीने का अतिरिक्त समय होता है जिसके कारण आगे आने वाले सभी व्रत और त्यौहार समय के साथ बढ़ जाते हैं। जैसे इस साल श्राद्ध पक्ष के बाद नवरात्रि एक महीने बाद आएगी। उसी तरह दीपावली और दशहरा भी आगे बढ़ जाएंगे।

अधिकमास में सूर्य को अर्घ ज़रूर दें

यदि आप अपनी सभी मनोकामनाओं को पूरा करना चाहते हैं तो अधिक मास के समय सूर्य को सुबह जल्दी अर्घ देना ना भूलें। अधिक मास के दौरान सूर्य को अर्घ देने से आपके रुके हुए कार्य सफल होते ही हैं साथी आपको नौकरी में भी पदोन्नति मिलने की संभावना बढ़ जाती है। एक बात और ध्यान रखें कि अधिक मास में जब भी आप सूर्य को अर्घ्य दें तो उस दौरान पीले रंग के वस्त्र ही पहने पीले रंग के वस्त्र से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और नियमित और देने से व्यक्ति की समस्त मनोकामना पूरी करते हैं। सूर्य देव ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक हैं। सबसे विशाल शक्ति पुंज होने के साथ ही सूर्य की आराधना व्यक्ति की सभी समस्याओं को दूर करती है।

खीर के भोग से चमकेगी किस्मत

अक्सर हम भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें मीठे पदार्थों का भोग लगाते हैं। यदि आप भी अधिक मास के दौरान ईश्वर को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें खीर का भोग लगाएं। विशेषकर चावल की खीर ईश्वर की आराधना में महत्व रखती है। एक बात और ध्यान रखें कि जब भी आप खीर का भोग लगाएं उसमें तुलसी पत्र को डालना ना भूलें। भोग लगाने के बाद प्रसाद का वितरण हर व्यक्ति को करें। और यदि संभव हो तो किसी गरीब इंसान को भी खीर जरूर खिलाएं।

ज़रूरतमंद लोगों को दान करें

हमारे पर्व और त्यौहारों में दान का विशेष महत्व माना गया है। दान करने से न केवल आत्मिक संतुष्टि मिलती है बल्कि इससे ईश्वर भी प्रसन्न होते हैं। साथ ही ज़रूरतमंद लोगों की भी सहायता हो जाती है। अगर आप अधिकमास के दौरान दान करना ही चाहते हैं तो प्रयास कीजिए कि आप पीली वस्तुओं का ही दान करें। क्योंकि यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है। इसलिए पीले रंग का महत्व काफी बढ़ जाता है। अगर आप किसी व्यक्ति को दान नहीं करना चाहते हैं तो फिर आप मंदिर में जाकर भी दान कर सकते हैं। या फिर किसी संस्था या ज़रूरतमंद व्यक्ति की सहायता कर सकते हैं।

तुलसी पूजा घर में लाएगी सुख और शांति

वैसे तो तुलसी पूजा हर रोज़ ही करनी चाहिए। लेकिन अधिकमास में तुलसी पूजा का काफी महत्व बताया गया है। तुलसी पूजा के साथ ही आपको तुलसी की 11 या 21 परिक्रमा भी करनी चाहिए। इसके अलावा ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः इस मंत्र का भी जाप करना चाहिए। क्योंकि श्रीहरि को तुलसी अत्यंत प्रिय है इसलिए तुलसी पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इससे आपके घर में हमेशा के लिए सुख और समृद्धि का वास होता है।

भागवत कथा से मिलती है आत्मिक शांति

यदि आपके घर में दक्षिणावर्ती शंख है तो उसकी पूजा भी इस दौरान अवश्य करें। अधिकमास के दौरान दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। संभव हो तो आप भागवत कथा का भी पाठ करें। भागवत कथा का पठन एवं श्रवण सभी प्राणियों के लिए हितकर होता है। साथ ही भागवत कथा सुनने या पढ़ने से व्यक्ति को आत्मिक शांति मिलती है। और उसके जीवन से परेशानियां शनै-शनै विलुप्त होने लगती हैं।

तो आप भी अधिक मास के दौरान हमारे द्वारा बताए सभी उपाय अपनाकर देखिये। इससे आपकी किस्मत बिलकुल ही बदल जाएगी और आपके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।

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