मनोकामनाओं की पूर्ती के लिए महाशिवरात्रि पर इस तरह करें पूजा

by | Feb 18, 2020 | Astrology | 0 comments

एस्ट्रोलॉजी से जुड़ी अनेक बातें आपको हैरान कर सकती हैं। कुछ चीज़ें ऐसी भी होती हैं जो आपके जीवन में एकदम से बदलाव लेकर आती हैं। लेकिन उनकी जानकारी न होने की वजह से आप उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। शिव इस सृष्टि का सबसे सरल और सर्वमान्य सत्य है। समस्त सृष्टि उन्हीं में समाई हुई है। महाशिवरात्रि पर शिव पूजा आपको विशेष फल प्रदान कर सकती है। कुछ शिव मंत्र और अभिषेक आपको समस्त बाधाओं से दूर रखेंगे। आइये इस बारे में अधिक जानकारी लेते हैं।

महाशिवरात्रि होगी विशेष

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर भक्त दिन भर भगवान की पूजा अर्चना कर सकेंगे। भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होंगी। इस बार महाशिवरात्रि के दिन शुक्रवार होने तथा श्रवण नक्षत्र होने के कारण भक्तों के लिए विशेष फलदायी योग बन रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार होता है कि मनुष्य अपने अंदर की ऊर्जा को कई गुना मज़बूत महसूस करता है। सोमवार का दिन भगवान को विशेष प्रिय होता है।

इस तरह महाशिवरात्रि पर करें शिव पूजा

विधिवत शिवलिंग पूजन के लिए स्वच्छ जल, गंगाजल, से स्नान कराने के बाद देशी घी, दूध, दही, शहद, शक्कर, भस्म, भांग, गन्ने का रस, गुलाब जल, दूध, चन्दन, चढाकर शिवलिंग पर लेप करना चाहिये। शिव पूजा के लिए अपने मन में पवित्रता रखें। उसके बाद जनेऊ, कलावा, पुष्प, गुलाब की माला, धतूरा, भांग, जौ, केसर, चन्दन, धूप, दीप, कलाकन्द मिठाई (दूध की बर्फी) चढ़ाने के बाद बेल पत्र (राम राम लिखे हुये चन्दन से) चढ़ाएं।

महाशिवरात्रि पर शंकरजी की पूजा देती है ये लाभ

महाशिवरात्रि पर शिव आराधना से प्रत्येक क्षेत्र में विजय, रोग मुक्ति, अकाल मृत्यु से मुक्ति, गृहस्थ जीवन सुखमय, धन की प्राप्ति, विवाह बाधा निवारण, संतान सुख, शत्रु नाश, मोक्ष प्राप्ति और सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

शिव पूजा से महाशिवरात्रि में होंगे ये संकट दूर

अगर आपके विवाह में देर हो रही हो जो इसी विधि से भगवान शंकर की स्थापना करके उन्हें शिव के दस द्रव्य चढ़ाएं। ये दस द्रव्य इस प्रकार हैं। बेल का फल, तिल पांच मुट्ठी, खीर एक कटोरी, सवा पाव घी, सवा पाव दूध, सवा पाव दही,

108 दूर्वा, चार अंगुल की वट की पांच लकड़ियां, चार अंगुल की पलाश की पांच लकड़ियां, और चार अंगुल की कत्थे यानि खैर की पांच लकड़ियां।

शिव पूजा करने से लक्ष्मी माता भी प्रसन्न होती हैं, क्योंकि लक्ष्मी जी अपने अखंड स्वरूप में केवल शिव जी के आदेश पर ही किसी भी स्थान पर प्रकट होती हैं। लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए तथा धन प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि के दिन शिवजी की अर्चना करना फलदायक है।

अनेक फलों की प्राप्ति के लिए इन शिव मंत्र का जाप करें

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि के दिन ही शिव जी का विवाह माता पार्वती से हुआ था। इसलिए यदि किसी व्यक्ति का विवाह नहीं हो पा रहा हैं, तो वह भी इस दिन व्रत एवं शिव पूजा करें। जल्दी विवाह करने के लिए शिवजी की पूजा करें और नीचे दिए गये शिव मंत्र का उच्चारण करें।

मंत्र – ” हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम “

यदि आपके घर में लगातार समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। तो आप शिवरात्रि के दिन पूजा कर इन समस्याओं से मुक्त हो सकते हैं। इसके लिए शिवरात्रि के दिन बेल पत्र, भांग, धतूरे को चढ़ाने के बाद निम्नलिखित शिव मंत्र का जाप करें।

मंत्र – ” ऊं साम्ब सदा शिवाय नमः “

यदि किसी व्यक्ति के पुत्र का विवाह नहीं हो पा रहा हैं तो पुत्र का विवाह शीघ्र करने के लिए भी आप इस दिन भोले की आराधना कर सकते हैं। इसके लिए एक मूंगा की माला लें और शिवजी की पूजा करने के बाद निम्नलिखित शिव मंत्र की एक माला का जाप अपने पुत्र से करवाएं।

जानिए रुद्र अभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है?

शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे हैं उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है।

जल से रुद्राभिषेक करने पर — वृष्टि होती है।
कुशा जल से अभिषेक करने पर — रोग, दुःख से छुटकारा मिलता है।
दही से अभिषेक करने पर — पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
गन्ने के रस से अभिषेक करने पर — लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
मधु युक्त जल से अभिषेक — धन वृद्धि के लिए।
तीर्थ जल से अभिषेक करने पर — मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से — बीमारी नष्ट होती है ।
दूध से अभिषेक करने से — पुत्र प्राप्ति, प्रमेह रोग की शान्ति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गंगाजल से अभिषेक करने से — ज्वर ठीक हो जाता है।
दूध, शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से — सद्बुद्धि प्राप्त होती है।
घी से अभिषेक करने से — वंश विस्तार होता है।
सरसों के तेल से अभिषेक करने से — रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
शुद्ध शहद रुद्राभिषेक करने से — पाप क्षय हेतु।

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