जॉइंट्स मज़बूत रखने हैं तो कभी न करें ये गलतियां

by | Jun 18, 2020 | Bone Problems, Self Care | 0 comments

बोन प्रॉब्लम्स हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती हैं। हमारे रोज़ के जीवन में हम कई ऐसे काम करते हैं, जिनका बुरा असर जॉइंट्स पर पड़ता है। जोड़ों के स्वास्थ्य को लेकर अगर सतर्कता नहीं रखी तो आगे जाकर चलना-फिरना भी मुश्किल हो सकता है। संभव है कि इसका कारण आपका अधिक वेट हो। कभी-कभी गलत फुटवियर की वजह से भी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसके अलावा तम्बाकू का सेवन भी जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल के मशहूर पेन फिजिशियन डॉक्टर विपुल अग्रवाल।

जॉइंट्स के लिए लापरवाही भरा रवैया

शरीर के सभी जॉइंट्स को आप एक ऐसी डिवाइस के रूप में समझ सकते हैं जो हड्डियों के बीच पुल का काम करते हैं। ये इस प्रकार से फिट होते हैं कि हड्डियों को भली-भांति संचालन का मौका मिल सके। इन जोड़ों के ही बीच होती है प्रकृति की कुशन व्यवस्था जो कि एक ल्युब्रिकेंट के तौर पर उपस्थित होती है। समय के साथ भी यह ल्युब्रिकेन्ट्स कम होता है लेकिन यदि जॉइंट्स की सेहत पर ध्यान न दिया जाए तो समय से पहले न केवल यह ल्युब्रिकेंट कम हो सकता है बल्कि सभी हड्डियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

कुछ खास गतिविधियां नुकसान पहुंचाती हैं जॉइंट्स को

रोज़मर्रा के जीवन में कई सारी गतिविधियां ऐसी हैं जिनका बुरा असर जोड़ों पर पड़ सकता है। चाहे फिर वे हाथ-पैरों के जॉइंट्स हों, कमर के या फिर अंगुलियों के। शरीर के किसी भी जोड़ पर लगातार दबाव पड़ने से तकलीफ उत्पन्न हो सकती है। कुछ इस तरह से आपकी आदतें नुकसान पहुंचा सकती हैं जोड़ों को।

अधिक वेट का होना

हो सकता है कि शरीर पर चढ़ रही चर्बी की कुछ अतिरिक्त परतें आपको परेशान न करती हों लेकिन वेट का लगातार बढ़ते रहना स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी बन सकती है। लगातार बढ़ते वेट या असंतुलित वजन के कारण जोड़ों पर लगातार दबाव पड़ता रहता है। याद रखिये कि शरीर में बढ़े हुए कुछ अतिरिक्त किलो से उसका लगभग 4 गुना दबाव घुटनों पर पड़ता है। यह दबाव पीठ, कमर और पैरों पर भी पड़ता है। इसके कारण लिगामेंट्स और मांसपेशियों में टूट-फूट होने लगती है और दर्द, क्षति तथा तकलीफ बढ़ती जाती है। बढ़ा हुआ वेट इन्फ्लेमेशन का कारण भी बनता है। जिसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न पैदा हो जाती है।

ओवर मैसेजिंग

क्या आपका ज्यादातर समय मोबाइल पर मैसेज टाइप करते, कम्प्यूटर पर चैट करते या ऐसे ही किसी काम में बीतता है। इससे आपके अंगूठों के टेंडन्स पर दबाव पड़ता है और वे अंगूठे को उसी मुड़ी हुई स्थिति में लॉक कर देते हैं। यही नहीं, लगातार झुकी स्थिति में फोन को देखते रहने से आपकी गर्दन और कन्धों के जोड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आपके सर के हर इंच झुकने से मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है। यदि आप अपनी गर्दन को इतना झुकाते हैं कि आपकी ठुड्डी, सीने को छूने लगती है, तो आपकी गर्दन को एक नहीं पांच सिरों जितना बोझ उठाना पड़ता है। इसी प्रकार कम्प्यूटर पर लम्बे समय तक काम करने से भी जोड़ों पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

गलत फुटवियर

यदि आप गलत फुटवियर पहनते हैं तो भी समस्या हो सकती है। ऊंची एड़ी के जूते जांघ की मांसपेशियों का काम बढ़ा देते हैं। इन मांसपेशियों को घुटनों को सीधा रखने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। ऊंची एड़ी के जूते पहनने से ऑस्टियोआर्थराइटिस की आशंका बढ़ जाती है। इसी तरह गलत साइज या आकार के फुटवियर पहनने से भी पैरों को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता। खासकर यदि आप दौड़ते या किसी स्पोर्ट को खेलते समय गलत फुटवियर पहनते हैं तो भी पैरों और जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। इसके उलट अधिक कुशन या आर्च सपोर्ट वाले जूते भी पैरों को प्राकृतिक रूप से काम करने नहीं देते, इसलिए इनसे भी बचें।

उंगलियां चटकाना

भले ही कभी खाली बैठे या खेल-खेल में आपने हाथों की अंगुलियां चटकाई हों लेकिन ऐसा बार-बार करना तकलीफदाई हो सकता है। शोध बताते हैं कि यह आदत आपकी ग्रिप बिगाड़ने के साथ ही हाथों के जॉइंट्स में सूजन भी ला सकती है।

भारी वज़न का दर्द

कंधे पर लदा भारी बैग या सामान कंधे और गर्दन में दर्द पैदा कर सकता है। खासकर लम्बे समय तक एक ही कंधे पर रखा गया सामान आपके पोश्चर को खराब कर सकता है। इससे मांसपेशियों पर खिंचाव बढ़ जाता है और जोड़ों को क्षति पहुंच सकती है। इसी तरह जब आप शरीर की छोटी-छोटी मांसपेशियों पर अधिक वज़न डालते हैं तो भी इसकी कीमत जोड़ों को चुकानी पड़ती है। इसके लिए कुछ तरकीबें अपनाएं जैसे किसी भारी दरवाज़े को खोलते समय उंगलियों की जगह कन्धों से धक्का दें, जमीन से कुछ वज़न उठाने के लिए घुटनों को मोड़ते हुए नीचे झुकें और सामान उठाएं और कोई भी सामान हाथ में उठाते समय हथेलियों पर उसका वजन रखें, बजाय उंगलियों पर उठाने के।

तम्बाकू का असर

सिगरेट या तम्बाकू में मौजूद निकोटीन हड्डियों के लिए होने वाले खून के बहाव में बाधा पैदा करने लगता है। तंबाकू हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी हॉर्मोन एस्ट्रोजन को भी नुकसान पहुंचाता है। यही नहीं यह शरीर को मिलने वाली कैल्शियम की मात्रा को भी सीमित कर देता है। इससे जोड़ कमज़ोर हो जाते हैं।

कम नींद का असर

शोध बताते हैं कि नींद की कमी से शरीर में इन्फ्लेमेशन यानी सूजन पैदा होती है। इससे आगे जाकर जोड़ों को नुकसान पहुंचता है। शोध यह भी बताते हैं कि अक्सर आर्थराइटिस के पीड़ितों में नींद पूरी न होने पर अधिक दर्द की शिकायत होती है। इसी तरह दिन-भर बैठे रहने वाली जीवनशैली, फिजिकली एक्टिव न रहना भी जोड़ों पर बुरा प्रभाव डालता है।

दर्द को नजरअंदाज न करें

व्यायाम शुरू करते समय थोड़ा-बहुत दर्द मांसपेशियों में होना सामान्य है लेकिन यह दर्द अगर बना रहे, सूजन हो या अन्य तकलीफ तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। लम्बे समय तक एक ही स्थिति में बार-बार जोड़ों पर दबाव पड़ने से भी तकलीफ बढ़ती है. इस स्थिति से भी बचें।

कुछ उपाय अपनाएं

• लम्बे समय तक बैठने का काम हो, खेलना हो या खड़े रहना हो, हर आधे घंटे में अपनी पोजीशन बदलें। भले ही अपनी जगह पर खड़े होकर स्ट्रेच करें या क़दमों को आगे-पीछे करें

• दफ्तर हो या घर अपने बिस्तर, कुर्सी-टेबल आदि को इस प्रकार का रखें कि उनसे आपके जोड़ों को सहारा मिले न कि जोड़ों पर दबाव पड़े

• बहुत झुककर, गर्दन झुकाकर या गलत पोश्चर से न बैठें। सोने, चलने और खड़े होते समय भी पोश्चर को ध्यान में रखें

• अल्कोहल की मात्रा कम से कम करें। इससे यूरिक एसिड बनता है जो जोड़ों के लिए तकलीफ पैदा करता है

• अपनी डाइट को पोषण से भरपूर बनायें। दही-दूध और प्रोटीन को भोजन में अवश्य शामिल करें। यह एक भ्रान्ति है कि खट्टा खाने से हड्डियों में तकलीफ होती है, कई लोग इसी वजह से दही नहीं खाते, ऐसा न करें

• एक्सरसाइज़ और फिजिकल एक्टिविटी का कोई विकल्प नहीं है। इसे नजरअंदाज न करें। यह याद रखें कि काम में लेंगे तो ही जोड़ों को स्वस्थ रख पाएंगे। यह बात हर व्यक्ति पर लागू होती है।

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Dr. Vipul Agrawal

Dr. Vipul Agrawal

MBBS, MD (AIIMS, Delhi)