ब्रैस्ट कैंसर के उपचार के बाद योगा से बढ़ाएं शारीरिक क्षमता

by | Jun 23, 2020 | Breast Cancer, Diet & Fitness | 0 comments

ब्रैस्ट कैंसर के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए चिकित्सा जगत में काफी सारे प्रयोग किए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी ये एक ऐसी बीमारी है जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। हालांकि अनेक प्रकार के कैंसर के लिए टीके आज उपलब्ध हैं तो कुछ कैंसर के लिए बहुत प्रभावकारी दवाइयां और थेरेपीज़ आ गई हैं। इन सबके साथ ही कैंसर के इलाज के बाद योगा के फायदों को लेकर भी कई शोध ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। इसका बहुत बड़ा कारण है ब्लड सर्कुलेशन का बढ़ना। आखिर वही तो अनेक बीमारियों का कारण माना जाता है। ये कैसे संभव है? इस बारे में जानकारी दे रही हैं रायपुर की प्रसिद्ध योग प्रशिक्षक श्रीमती मंजू झा।

अनेक सकारात्मक परिणाम आएं हैं ब्रैस्ट कैंसर के इलाज में

स्तन कैंसर के मामले में पिछले कुछ सालों में बहुत अच्छे शोध परिणाम सामने आए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि कई कैंसर ऐसे हैं जिनका सही समय पर इलाज होने से मरीज़ लम्बी और स्वस्थ उम्र जी सकता है। स्तन कैंसर इनमें से एक है। इसके लिए न केवल बहुत आधुनिक और उन्नत जांचें मौजूद हैं बल्कि कई थेरेपी भी ब्रैस्ट कैंसर की कोशिकाओं के नियंत्रण में बहुत मददगार हो रही हैं। इसलिए ही लगातार ब्रैस्ट कैंसर के लिए ‘स्व परीक्षण’ पर बहुत ज़ोर दिया जा रहा है। स्व परीक्षण की इस प्रक्रिया को बहुत आसानी से इंटरनेट से भी सीखा जा सकता है या फिर अपने डॉक्टर, स्वास्थ्य केंद्र आदि से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है। कोई भी महिला इसे सीख और प्रयोग में ला सकती है। सबसे ज़्यादा ज़रुरी है अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता।

एक्सरसाइज़ होती है उपयोगी ब्रैस्ट कैंसर और अन्य कैंसर से बचाव में

लोग अक्सर यह समझते हैं कि एक्सरसाइज़ का महत्व सिर्फ स्वस्थ रहने की स्थिति में ही है। यह एक आम धारणा होती है कि एक्सरसाइज़ बीमार होने से तो बचा सकती है लेकिन बीमार होने के बाद इसको उतनी आसानी से प्रयोग में नहीं लाया जा सकता। यही कारण है कि सर्जरी के पश्चात् कई लोग उतने अच्छे परिणाम नहीं पाते, जितने मिल सकते हैं। हाल ही में यूनिवर्सटी ऑफ विंडसर में हुए एक शोध के अनुसार कैंसर के सर्वाइवर्स (कैंसर से लड़कर बाहर आने वाले) लोगों को अष्टांग योगा से बहुत फायदा मिल सकता है।

योगा से बढ़ती है शरीर और दिमाग की मज़बूती

जी हां स्तन कैंसर के मामलों में सर्जरी के बाद खासतौर पर शरीर के ऊपरी हिस्से को मज़बूती देना, बांहों के संचालन को सुचारू बनाना, शरीर को लचीला बनाना, सर्जरी के घावों को जल्दी भरने में मदद करना, रिकवरी में मदद करना आदि योगा की सहायता से किया जा सकता है। इन सबके साथ ही योग क्रियाओं का मेडिटेशन वाला हिस्सा मरीज़ को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने में भी मदद करता है। इससे सर्जरी के बाद की थेरेपीज़ के असर को और भी सकारात्मक और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर

नियमित की जाने वाली योग क्रियाएं ब्रैस्ट कैंसर से बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ये शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू करती हैं और रक्त में ऑक्सीजन के संतुलन को बनाये रखती हैं। इससे हर कोशिका को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसी तरह स्तन कैंसर सर्जरी तथा इसके बाद के इलाज में भी योग क्रियाएं बहुत लाभदायक साबित होती हैं। क्योंकि आपका सर्कुलेशन अच्छा रहेगा तो कैंसर की संभावना न के बराबर रहेगी। इसलिए योगा से ब्लड सर्कुलेशन को सही बनाकर रखना उचित है। यहां ध्यान रखने लायक सबसे पहली बात है कि सर्जरी के बाद 6 माह तक ब्रैस्ट या उसके आस-पास की जगह पर प्रेशर डालने या उस स्थान को स्ट्रेच करने से बचें। अपने डॉक्टर और योग प्रशिक्षक से सलाह और मार्गदर्शन लें। इस स्थिति में प्राणायाम बहुत मददगार साबित होता है और इसे सर्जरी के बाद जल्दी भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

इसके कुछ समय बाद सर्पासन, भुजंगासन, बिना एड़ी उठाए किये जाने वाला ताड़ासन, वक्ष श्वसन आसन तथा स्कन्द चक्र आसन आदि किये जा सकते हैं। ध्यान तथा वक्ष श्वसन आसन के दौरान अपने मन को सर्जरी वाली जगह पर ले जाकर एकाग्र करें। फिर खुद से बार बार दोहराएं कि-आज मैं पहले से अधिक स्वस्थ हो रही हूं, मेरा शरीर अब सामान्य स्थिति में आ रहा है, मैं पूरी तरह ठीक हो रही हूं, आदि। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है जिसका असर पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह हमेशा याद रखें कि योग या कोई भी व्यायाम कुछ दिनों के लिए नहीं है, इसे आपको नियमित रूप से जीवन-भर के लिए अपनाने से ही सही फायदा मिल पायेगा।

तो आप भी ब्रैस्ट कैंसर के उपचार के बाद या उससे बचने के लिए योगा ज़रुर करें।

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Dr. Manju Jha

Dr. Manju Jha

Yoga Instructor, Raipur