अब ब्रैस्ट कैंसर का उपचार संभव है इन तकनीकों के साथ

by | Aug 21, 2020 | Breast Cancer, Self Care | 0 comments

भारत में ब्रैस्ट कैंसर के मरीज़ों की संख्या बहुत ही तेज़ी से बढ़ रही है। स्तन कैंसर के बारे में महिलाओं में जागृति लाने के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी 80 प्रतिशत महिलाएं स्तन कैंसर या उसके लक्षणों के बारे में बहुत कम जानती हैं। देश में स्तन कैंसर के मरीज़ लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन संकोच तथा मन में दबे भय के कारण बहुत सारी महिलाएं जांच के लिए आगे ही नहीं आती। उनकी ये सोच उन्हें मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देती है। थोड़ी सावधानी और सतर्कता से आप अपने जीवन को ब्रैस्ट कैंसर से सुरक्षित रख सकती हैं। मैमोग्राम और कीमोथेरपी जैसे अनेक उपचार हैं जो स्तन कैंसर में मददगार होते हैं। इसके अलावा रेडियो थेरेपी भी इलाज में काफी फायदेमंद साबित होती है। इस बारे में पुणे स्थित आदित्य बिड़ला मेमोरियल हॉस्पिटल की ऑन्को और ऑन्को प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर शिल्पी डोलस आपको और जानकारी दे रही हैं।

ऐसे पहचानें ब्रैस्ट कैंसर के लक्षणों को

महिलाएं अपने स्तर पर भी ब्रैस्ट कैंसर का परीक्षण या पहचान कर सकती हैं। कुछ खास लक्षण जैसे:

1. स्तन में या कांख में गठान होना, स्तनों का रंग काला या लाल होना
2. स्तनों के आकार में बदलाव होना
3. स्तन की त्वचा खींची-खींची रहना
4. स्तनों में खुजली होना
5. 15 दिन से अधिक समय तक स्तनों पर हुआ जख्म ना भर पाना
6. स्तनों से पानी या खून बहना

अधिकतर महिलाएं ब्रैस्ट कैंसर की जांच के लिए आगे नहीं आती। उनके मन का भय कम करने के लिए उन्हें खुद ही अपने स्तनों की जांच करना सीखना चाहिए। स्तन कैंसर के बारे में लोगों को जागृत करने के लिए अनेक प्रयत्न किए ही जा रहे हैं। लेकिन अपनी जांच करवाने के लिए महिलाओं का भी आगे आना ज़रूरी है।

ब्रैस्ट कैंसर के होते हैं दो प्रकार

1. डक्टल कार्सिनोमा यह एक प्रकार का ब्रैस्ट कैंसर है। महिलाओं में पाए जाने वाले 80 प्रतिशत मरीज़ों में स्तन कैंसर का कारण इन्वेजिव डक्टल कार्सिनोमा ही होता है। इसमें डक्ट वॉल से होते हुए कैंसर स्तन के चर्बीवाले हिस्से तक फैल जाता है। स्तन कैंसर का यह प्रकार दूध के डक्ट में विकसित होता हैं।

2. इन्फ्लेमेटरी स्तन कैंसर बहुत कम होता है। इस प्रकार के स्तन कैंसर का इलाज बहुत कठिन होता है। यह शरीर में बहुत तेज़ी से फैलता है। जिससे महिलाओं में मौत का खतरा सबसे अधिक रहता है। इन्फ्लेमेटरी स्तन कैंसरग्रस्त महिलाओं का प्रमाण 1 फीसदी से भी कम होता है।

3. पेजेट्स डिज़ीज़ में स्तन कैंसर निप्पल के आसपास शुरू होता है। जिससे निप्पल के चारों ओर का हिस्सा काला पड़ने लगता है। पेजेट्स डिज़ीज़ उन महिलाओं को होता है जिन्हें स्तनों से संबंधित समस्याएं होती हैं। इन समस्याओं में निप्पल में खुजली होना, स्तनों में दर्द होना, इंफेक्शन होना प्रमुख है। यह स्तन कैंसर 5 फीसदी से कम होता है।

4. महिलाओं में पाए जाने वाले इन स्तन कैंसर के अलावा ट्यूबुलरकार्सिनोमा, मेड्युलरी कार्सिनोमा, म्यूकस कार्सिनोमा, लोबुलर कार्सिनोमा जैसे कई अन्य प्रकार के स्तन कैंसर होते हैं।

स्तन कैंसर के स्टेज

स्टेज 0- कैंसर के इस स्टेज में दूध बनाने वाले टिश्यू या डक्ट में बना कैंसर वहीं तक सीमित हो और शरीर के किसी अन्य हिस्से, यहां तक स्तन के बाकी हिस्सों में भी नहीं पहुंचा हो तो उसे 0 स्टेज का कैंसर कहते हैं।

स्टेज 1- स्टेज 1 में टिश्यू का विस्तार होने लगता है और स्वस्थ टिश्यू को प्रभावित करने लगता है। यह स्तन के फैटी टिश्यू तक फैला हो सकता है और स्तन के कुछ टिश्यू नज़दीकी लिंफ नोड में भी पहुंच सकते हैं।

स्टेज 2- इस स्टेज का स्तन कैंसर बढ़कर अन्य हिस्सों तक फैलता है। ये भी हो सकता है कि यह अन्य हिस्सों तक फैल चुका हो।

स्टेज 3- स्टेज 3 में कैंसर हड्डियों या अन्य अंगो तक फैल चुका हो सकता है। इसके अलावा बाहों के नीचे 9 से 10 लिंफ नोड में और कॉलर बोन में इसका छोटा हिस्सा फैल चुका हो सकता है। इस कारण से इसके उपचार में कठिनाई आती है।

स्टेज 4 – स्तन कैंसर के स्टेज 4 में लिवर, फेफड़ा, हड्डी और दिमाग तक कैंसर फैल चुका होता है। यह स्थिति खतरनाक होती है।

मेमोग्राम करवाएं

महिलाओं के लिए मेमोग्राम टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है। मेमोग्राम टेस्ट करने से ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण दो से पांच सालों में समझ सकते हैं। अनुवांशिक कारणों से स्तन कैंसर की आशंका जिन महिलाओं को है उन्हें कैंसर की जांच करने से पहले जेनेटिक काउंसिलर से परामर्श लेना आवश्यक है। लेकिन मेमोग्राम बहुत हद तक टेस्ट के अच्छे परिणाम देता है। 50 साल के बाद महिलाओं को मेमोग्राम टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए।

कीमोथेरेपी कठिन लेकिन असरदार इलाज

यह पद्धती पहले बहुत कठिन थी। लेकिन अभी अनेक दवाइयां दी जाती हैं जिससे कीमोथेरेपी की तकलीफ सह पाना मरीजों के लिए कम तकलीफ दायक होता है। कीमोथेरेपी के कारण पहले बहुत बाल झड़ते थे लेकिन अब नई दवाओं के कारण बाल झड़ना कम हुए हैं। महिला को किस प्रकार का कैंसर है उससे संबंधित दवाई भी अब मिलने लगी है। कीमोथेरेपी के बारे में कहें तो उसमें नई दवाइयां तैयार हुई हैं। टारगेटेड थेरेपी में स्तनों के विशिष्ट भाग में ट्युमर पर हमला किया जा सकता है, जिसके परिणाम बहुत ही अच्छे हैं और दुष्परिणाम कम होते हैं। इसी आधार पर हम ऐसा कह सकते हैं कि, स्तन कैंसर के उपचार का भविष्य आशादायी लगता है।

सर्जरी

इस उपचार पद्धति में काल के अनुसार अनेक बदलाव किए गए हैं। पहले कैंसर ग्रस्त स्तन पूरी तरह से शरीर से निकाल देने की पद्धति थी। अभी भी ट्युमर छोटा हो तो बहुत सारे मरीजों की स्तन रक्षण सर्जरी की जाती है। ट्युमर बड़ा हो तो कीमोथेरेपी की मदद से स्तन रक्षण की सर्जरी की जाती है।

रेडियोथेरेपी भी कारगर उपचार है

कीमोथेरेपी तथा सर्जरी के बाद विकसित ट्युमर के लिए रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है। ये रेडियोथेरेपी बहुत मददगार साबित होती है। उसी कारण उसी जगह फिर से कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। स्तन रक्षण का पर्याय चुननेवाले मरीज़ों को रेडिएशन रेडियो थेरेपी करना ही पड़ती है। रेडियो थेरेपी में भी बहुत बड़ी प्रगति हुई है। आधुनिक तकनीक के कारण रेडियो थेरेपी की अवधि कम हुई है और दुष्परिणाम भी कम हुए हैं।

तो आप भी सजग होकर ब्रैस्ट कैंसर से लड़ने के लिए इन तकनीकों की मदद लीजिये।

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