दूषित पानी और खाना दे सकता है कॉलरा

by | Aug 19, 2019 | Contagious Diseases, Self Care | 0 comments

कॉन्टेजियस डिज़ीज़ेस मनुष्य की लापरवाही का परिणाम ही होती हैं। बस थोड़ा ही आपका ध्यान चूका और आप संक्रामक बीमारियों का शिकार हुए। बरसात के समय इस तरह की बीमारियां कुछ ज़्यादा बढ़ जाती हैं। ऐसी ही एक बीमारी है जिसे कॉलरा के नाम से जाना जाता है। यह संक्रमण वाइब्रियो कॉलेरी नाम के बैक्टीरिया से पनपता है। यह बैक्टीरिया दूषित खाने और पानी में पाया जाता है। जल्द से जल्द यदि कॉलरा ट्रीटमेंट नहीं मिले तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। कुछ घरेलू उपाय करके भी आप इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं। जैसे आप क्लोव्स मतलब लौंग और तुलसी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। लेकिन समस्या बहुत बढ़ गई हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ही सही रहता है। आइये इस पोस्ट के माध्यम से हम इस बीमारी को समझें।

बारिश में बढ़ जाती है कॉलरा की समस्या

वर्षा ऋतु में संक्रमित पदार्थों का सेवन कई बीमारियों को बुलावा देता है। दूषित जल या भोज्य पदार्थ ग्रहण करने से हमारे पाचन तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कॉलरा भी ऐसा ही एक रोग है। यह दूषित जल या भोज्य पदार्थों से होने वाले संक्रमण का परिणाम है। बारिश के मौसम में एकत्रित पानी, गंदगी में अनेकों बैक्टीरिया पनपते हैं। जब मक्खियां इन बैक्टीरिया को खाद्य व पेय पदार्थों पर छोड़ती हैं तो वे भी संक्रमित हो जाते हैं। ऐसे पदार्थों को जब मनुष्य ग्रहण करता है तब यह उसके शरीर में पहुंच जाते हैं। यही कारण होता है कॉलरा रोग होने का।

कॉलरा एक प्रकार का बैक्टीरिया जनित रोग है जो ‘वाइब्रियो कॉलेरी’ नामक बैक्टीरिया से फैलता है। जिन स्थानों पर सफाई नहीं होती, गन्दा पानी एकत्रित हो, वहां यह बैक्टीरिया आसानी से पनपता है। गंदे व संक्रमित पानी में उगाई गई सब्ज़ियों के सेवन से भी यह बैक्टीरिया शरीर में पहुंचता है।

किसी को भी हो सकता है कॉलरा का संक्रमण

वैसे तो यह रोग किसी भी वर्ग या उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। पर मुख्य रूप से बच्चों, वृद्धों व गर्भवती महिलाओं को इसका खतरा रहता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक प्रणाली कमज़ोर होती है उन्हें ये रोग दूसरों की अपेक्षा जल्दी पकड़ता है। ज़रूरी है कि कॉलरा का समय पर उपचार किया जाए अन्यथा रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। इस रोग के शुरूआती चरण में रोगी को उल्टी व दस्त होते हैं। स्थिति गंभीर होने के साथ ही रोगी की परेशानी बढ़ती जाती है। इसमें रोगी पतला मलत्याग करता है जिससे उसके शरीर में पानी की कमी हो जाती है। हैजे में शरीर से पानी के अलावा अन्य आवश्यक तत्व जैसे सोडियम, पौटेशियम का स्तर भी घटता है। इससे पीड़ित का रक्त अम्लीय हो जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है।

वाइब्रियो कॉलेरी से फैलता है ये संक्रमण

यह बात हम आपको पहले ही बता चुके हैं। जी हां कॉलरा का मुख्य कारण ‘वाइब्रियो कॉलेरी’ नाम का बैक्टीरिया होता है। इसके शरीर में पहुंचने पर संक्रमण के लक्षण दिखने में कुछ घंटों से लेकर 2 दिन का समय लगता है। रोगी के पूर्णतः ठीक होने तक वाइब्रियो कॉलेरी बैक्टीरिया उसके शरीर में मौजूद रहता है। इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण भी एक उपाय है। एक बार कॉलरा का टीका लगवाने पर करीब 6 महीनों के रोग से सुरक्षा मिलती है।

ऐसे होते हैं कॉलरा के लक्षण

• उल्टी
• अतिसार
• निर्जलीकरण, रोगी को अधिक प्यास लगना
• रोगी के शरीर का तापमान असामान्य रहना।
• रोगी का मूत्रत्याग न कर पाना
• आंखें भीतर की ओर धंस जाना
• हाथ-पैरों में अकड़न व ऐंठन, मांसपेशियों में दर्द होना
• बिना अधिक शारीरिक श्रम किए रोगी को कमज़ोरी महसूस होना
• पेट दर्द, बेचैनी व सिरदर्द

आसान है कॉलरा ट्रीटमेंट

आज हैजा का रोग एक माहामारी की तरह फैल रहा है। इस रोग के कारण होने वाली मृत्युदर को कम करने का एक ही उपाय है, समय पर उपचार। कुछ घरेलू व आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर प्रारंभिक चरण में ही कॉलरा ट्रीटमेंट किया जा सकता है।

रोगी के शरीर में पानी की पूर्ति के लिए आवश्यक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। दिन में नियमित अंतराल पर रोगी को नींबू पानी व नारियल पानी पीते रहना चाहिए। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करने में ओ.आर.एस घोल सहायक होता है। रोगी को दिन में 4-5 बार इसका सेवन कराने से डिहाइड्रेशन नहीं होता। ये कॉलरा ट्रीटमेंट में सबसे ज़्यादा काम आता है। इसके अलावा भी कुछ आसान कॉलरा ट्रीटमेंट से ये बीमारी ठीक हो सकती है।

तुलसी का सेवन भी है लाभकारी

रोगों के उपचार में वर्षों से तुलसी के औषधीय गुणों का प्रयोग होता आया है। तुलसी व कालीमिर्च को पीसकर चूर्ण का सेवन करने से रोग के लक्षणों में कमी होती है। यदि आप रोगी को तुलसी का पानी भी देते हैं तो इससे भी लाभ होता है। तो आप भी कॉलरा में तुलसी को ज़रूर उपयोग करें।

क्लोव्स भी देते हैं कॉलरा में राहत

लौंग के तेल की 2-3 बूंद रोगी को देने से हैजे में फायदा होता है। पानी में क्लोव्स उबाल लें। अब क्लोव्स में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर ठंडा कर लें। रोगी को दिन में 2-3 बार क्लोव्स का पानी देना लाभप्रद होता है। तो आप भी इसे इस्तेमाल करके ज़रूर देखें।

ऐसे करें कॉलरा की रोकथाम

1. दूषित भोज्य व पेय पदार्थों का सेवन न करें।
2. शरीर में पानी की कमी न होने दें।
3. खाद्य पदार्थों को हमेशा ढककर ही रखें।
4. अधिक गरिष्ठ भोजन करने से परहेज़ करें।
5. अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखें।

तो इन बातों को ध्यान में रखें और कॉलरा से बचे रहें। कॉलरा पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपनी विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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