स्वाइन फ्लू : कितना घातक हो सकता है आपके लिए! | Swine Flu: How much harmful it could be?

by | Feb 28, 2019 | Contagious Diseases | 1 comment

इन दिनों स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में कोहराम मचा हुआ है। यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि कब और कैसे व्यक्ति को चपेट में ले लेती है पता नहीं चलता। पिछले 4-5 सालों में देश-भर में स्वाइन फ्लू का कहर जारी रहा। इस बीमारी ने न जाने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया। बच्चों से लेकर बड़ों तक में स्वाइन फ्लू के लक्षण (Swine Flu Symptoms) देखे गये। स्वाइन फ्लू का प्रभाव (Swine Flu Effect) इतना तेज़ है कि व्यक्ति को जल्द अपनी गिरफ्त में ले लेता है।

क्या है स्वाइन फ्लू?

स्वाइन फ्लू को एच1एन1 (इंफ्लूएंज़ा वायरस) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक संक्रामक बीमारी है। सही समय पर इसका इलाज न मिलने से मरीज़ की जान भी जा सकती है। इंफ्लूएंज़ा वायरस सीधे इंसान के श्वसन तंत्र पर आक्रमण करता है। स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से सूअर के कारण उत्पन्न होता है। स्वाइन फ्लू के लक्षण (Swine Flu Symptoms) आम फ्लू की तरह ही होते हैं। इसलिए व्यक्ति इसे साधारण समझकर इसका उपचार नहीं करवाता है।

किन लोगों को स्वाइन फ्लू का प्रभाव (Swine Flu Effect) अधिक होता है?

वैसे तो स्वाइन फ्लू किसी को भी अपना शिकार बना सकता है। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इस बीमारी की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति भी स्वाइन फ्लू की गिरफ्त में आ सकते हैं। फेफड़ों, किडनी और दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी ख़ास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसलिए जैसे ही स्वाइन फ्लू के लक्षण (Swine Flu Symptoms) प्रकट हों तुरंत उपचार करवाएं।

स्वाइन फ्लू के लक्षण (Swine Flu Symptoms)

• लगातार नाक का बहना
• छींक आना
• ख़ासी बने रहना
• सर्दी जल्दी से ठीक न होना
• असहनीय सरदर्द
• थकान लगना
• मांसपेशियों में दर्द या अकड़न होना
• सांस लेने में परेशानी होना
• दवा के लेने पर भी बुखार का न उतरना
• गले में दर्द और खराश का होना
• उल्टी और डायरिया का होना

स्वाइन फ्लू की सतर्कता

• बीमारी जब फैली हो तो भीड़-भाड़ वाले इलाकों में न जाएं।
• हाथों को हमेशा अच्छे से धोएं, चाहे आप कुछ खा रहे हों या नहीं।
• सर्दी होने पर अपना मुंह और नाक हमेशा कवर करके रखें।
• चेहरे और आंखों पर हाथ न लगायें।
• स्वाइन फ्लू के लक्षण (Swine Flu Symptoms) दिखने पर तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएं।
• पानी का पर्याप्त मात्रा में सेवन करते रहें।
• लोगों से हाथ मिलाने से बचें।
• यदि आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर है तो आप मास्क का उपयोग भी कर सकते हैं।

स्वाइन फ्लू के उपचार

• एक रुमाल में कपूर और इलायची को पीसकर रखें और इसे सूंघते रहें।
• घर के आस-पास नीम की पत्तियों को जलाएं। नीम का धुआं स्वाइन फ्लू के वायरस से बचाव करता है।
• सुबह उठने के बाद करीब पांच तुलसी के पत्तों का सेवन ज़रूर करें। इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
• गिलोय जिसका प्रचलन आजकल बहुत अधिक बढ़ गया है यदि आप इसका काढ़ा बनाकर पियेंगे तो बहुत अच्छा प्रभाव होगा और आप इस संक्रमण से बचे रहेंगे।
• लहसुन जी हां आपके किचन में पाया जाने वाला लहसुन भी स्वाइन फ्लू से बचाव में मददगार है। रोज़ सुबह दो कली का सेवन खाली पेट गुनगुने पानी से करें।
• एलोवेरा आपके सौन्दर्य को बढ़ाने में सहायक है। साथ ही स्वाइन फ्लू के इफ़ेक्ट (Swine Flu Effect) से भी आपको दूर रखता है।
• मसालों के रूप में उपयोग की जाने वाली हल्दी भी एच1एन1 वायरस से आपको सुरक्षित रखती है। हल्दी की एक खासियत है कि इसे कितने भी ऊंचे तापमान पर गर्म किया जाये इसके गुण ख़त्म नहीं होते। इसका सेवन आप गर्म दूध के साथ भी कर सकते हैं।

स्वाइन फ्लू के आयुर्वेदिक उपचार

• तुलसी के पत्तों के साथ 1 से 2 ग्राम पिपली को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसमें शहद मिलाकर मरीज़ को पिला दें।
• सितोपलादि चूर्ण को शहद के साथ सुबह शाम लेने से भी आपकी प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है।
• गुडूची, पुष्करमूल, पिपली और तुलसी मिलाकर उसका काढ़ा बना लें। यह काढ़ा भी स्वाइन फ्लू के प्रभाव (Swine Flu Effect) से बचाने में मददगार होता है।
• आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार इलायची को पीसकर उसमे नीलगिरी का तेल डालकर रुमाल में रखकर उसे सूंघें।
• आयुर्वेदिक औषधियां जैसे त्रिभुवन कीर्ति रस, लक्ष्मी विलास रस, संजीवनी बूटी और गुड़ दि का सेवन करें। यह आपको स्वाइन फ्लू के असर (Swine Flu Effect) से आपको दूर रखने में मदद करेगा। इन सभी उपायों को अपनाये और इस जानलेवा बीमारी से खुद को बचाए रखें।

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