उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो चलिए 10000 स्टेप्स

by | Jun 16, 2020 | Diet & Fitness, Sports & Fitness | 0 comments

स्पोर्ट्स एंड फिटनेस में वॉक हमेशा महत्वपूर्ण मानी गई है। खासकर ब्रिस्क वॉक हमेशा से फायदेमंद रही है। स्वस्थ रहने के लिए इससे अच्छा कोई विकल्प नहीं है। अभी पिछले कुछ सालों में दस हजार कदमों को लेकर लोगों में बहुत उत्साह आया है, खासकर नौजवानों में अब ये दस हजार कदम चलने का क्या फंडा है? ये पैमाना स्वास्थ्य की नई परिभाषा गढ़ने लगा है। ये न केवल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों को दूर रखने में मददगार है बल्कि वेट लॉस में भी हेल्पफुल रहता है। आइये इस बारे में ग्वालियर के जाने माने फिज़ियोथेरेपिस्ट डॉक्टर तुषार घोड़के की सलाह मानी जाये।

क्या है ब्रिस्क वॉक?

देखिये एक होता है चलना और एक होता है दौड़ना। तो ब्रिस्क वॉक इनके बीच की स्थिति है। इसमें चलते हुए ही दौड़ने जैसी स्थिति रखी जाती है। इससे पूरे शरीर में एक स्फूर्ति आती है। इसलिए ब्रिस्क वॉक को महत्वपूर्ण माना गया है।

ब्रिस्क वॉक के फायदे

पैदल चाल, ब्रिस्क वॉक या तेज़ चलना, जिस भी गतिविधि को आप रोज़ाना के हिसाब से अपनाते हैं, आपके स्वास्थ्य को मिलने वाला फायदा कई गुना बढ़ जाता है। सामान्य स्थिति में चलना शुरू करने के कुछ ही समय बाद आपको शरीर हल्का महसूस होने लगता है। आपके जोड़ों और मांसपेशियों की ताकत बढ़ी हुई महसूस होती है। त्वचा पहले से अधिक मुलायम महसूस होने लगती है, आपकी दिनभर की ऊर्जा में बढ़ोत्तरी होती है, नींद भरपूर और समय पर आने लगती है और आपका मूड अच्छा रहने लगता है। इसके अलावा कुछ गंभीर बीमारियों की आशंका को भी कम किया जा सकता है, इनमें शामिल हैं

• हार्ट डिसीज और स्ट्रोक
• हाई ब्लड प्रेशर
• डायबिटीज
• मोटापा
• डिप्रेशन

कुछ प्रकार के कैंसर भी ठीक हो सकते हैं ब्रिस्क वॉक से

जी हाँ ये कोरी कल्पना नहीं है। ब्रिस्क वॉक कैंसर जैसी बीमारी को भी हील कर सकती है। इसमें कोलोन कैंसर या ब्रैस्ट कैंसर भी शामिल किये जा सकते हैं। यदि आप शुरु से ही अपने रूटीन में ब्रिस्क वॉक अपनाते हैं तो कैंसर की संभावना काफी कम हो जाती है।

उम्र के साथ घटते भी हैं कदम

शारीरिक अवस्था और उम्र दो ऐसी चीजें हैं जो कदमों की रफ्तार पर असर डाल सकती हैं। शोध इस बारे में और भी स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं जिसके अनुसार 18 वर्ष से अधिक के वयस्क रोजाना औसतन कुल मिलाकर 4-18 हजार कदम तक चलते हैं जबकि 18 वर्ष से कम उम्र लोगों के लिए कदमों की यह संख्या 10-16 हजार हो सकती है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि किशोर (टीनएजर्स) जैसे ही 18 वर्ष के आंकड़े पर पहुंचते हैं उनके रोज़ाना के कदमों की संख्या महत्वपूर्ण स्तर पर घट जाती है। यानी वयस्क होते ही फिजिकल एक्टिविटी की तरफ लोगों का रुझान कम होने लगता है, जबकि बचपन से टीन एज तक यह तेज़ होता है। इसके बाद 40-45 के बाद कदमों की रफ्तार फिर से धीमी हो जाती है। इसके पीछे उम्र से जुड़ी कई स्थितियां भी हो सकती हैं।

पुरुष चलते हैं अधिक

इस तथ्य के पीछे के कारण भी कई हो सकते हैं लेकिन सच यही है कि पुरुष महिलाओं की तुलना में अधिक कदम चलते हैं। खासतौर पर बचपन से लेकर वयस्क होने तक पुरुष अधिक चलते हैं। बचपन और किशोरावस्था के दौरान वे रोजाना औसतन करीब 12-16 हजार कदम चलते हैं। जबकि उम्र के इसी पड़ाव के दौरान महिलाएं रोजाना औसतन 10-12 हजार कदम चलती हैं। वयस्क होने के बाद भी यह अंतर जारी रहता है। घर, दफ्तर अन्य जिम्मेदारियों तथा परिवार का ध्यान रखने की भागदौड़ के बावजूद महिलाएं चलने के मामले में पुरुषों से पीछे रह जाती हैं।

काम का असर

बदली जीवनशैली में काम के तरीके भी बदले हैं। कॉर्पोरेट कल्चर में अब लम्बे समय तक बैठे रहने वाले काम बढ़ गए हैं। इनकी वजह से भी पैदल चलने और फिजिकल एक्टिविटी में कमी आई है। ज़ाहिर है कि पैदल चलने की आदत किसी की काम की प्रवृत्ति पर भी निर्भर करती है। इस संदर्भ में किये गये एक शोध में यह सामने आया कि चलने के मामले में किसान से लेकर ठेले पर फेरी लगाने वाले लोग, नर्स और वॉर्ड बॉय या इसी तरह के सहायक, वेटर, टीचर्स, आदि जहां दिनभर में औसतन ज्यादा कदम चलते हैं। वहीं दफ्तर के क्यूबिकल में बैठे कर्मचारी, विशेषकर कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग बहुत कम कदमों तक सीमित रह जाते हैं।

100 कदम प्रति मिनिट

पैदल चलने का मतलब टहलना नहीं है। आपको इस दौरान तेज गति से कदम बढ़ाने होते हैं। वह भी नाक से सांस लेते। अगर आप पहली बार, लम्बे समय बाद या किसी सर्जरी या बीमारी के बाद चलना शुरू कर रहे हैं तो शुरुआत सिर्फ 10 मिनिट, मद्धम गति से करें। इसे हर दो दिन में 5 मिनिट बढ़ाएं और कम से कम 45 मिनिट्स पर ले जाएं। चलने की गति भी धीरे-धीरे बढ़ाएं। आपकी गति करीब 100 कदम प्रति मिनिट की होनी चाहिए। इससे आप हर सप्ताह करीब 15,000 स्टेप्स चल पाएंगे, मतलब हर दिन 2000 कदम के करीब। जब आप 300 कदम प्रति मिनिट तक पहुंच जाएंगे तो यह करीब 5000 कदम हर दिन के आंकड़े पर पहुंच जायेगा।

तेज़ चलने से वेट लॉस में मिलती है मदद

याद रखिए कि रोज़ाना का यह चलना इतना तेज़ होना चाहिए कि आप लगभग हांफ जाएं और आपको पसीना भी आ जाए। इससे वेट लॉस में भी मदद मिलेगी। इन पांच हजार कदमों के अलावा दिनभर में आप जितना चलेंगे वह फायदे में एड होता जाएगा। लेकिन चूंकि वह इतना तेज चलना नहीं होगा इसलिए दिन में एक बार तो आपको तेज चलने का लक्ष्य रखना ही होगा। कुल मिलाकर आप दिनभर में 10,000 कदमों का लक्ष्य पा लेंगे और यह आपकी सेहत को फायदे ही फायदे देगा। वेट लॉस के लिए आपको ज़्यादा मशक्क्त नहीं करनी पड़ेगी। दिन-भर की इस एक्टिविटी में कुछ और परिवर्तन आपके फायदे को बढ़ा देंगे, जैसे-

• एस्केलेटर या लिफ्ट की जगह सीढ़ी का प्रयोग
• अपने वाहन को पार्किंग में सबसे दूर लगाएं
• दोस्तों या परिवार को भी तेज चलने में शामिल करें
• घर की सफाई करें
• काम के बीच ब्रेक में चलें
• आजकल फोन, स्पेशल वॉच

आदि में ऐसी सुविधा होती है कि आप कदमों का लक्ष्य इसमें सेट करके रख सकते हैं। यह गणना करके बताती रहती है कि आप कितने कदम चले। इस सुविधा का लाभ लें।

रेस्ट और डाइट का भी ध्यान रखें

10 हजार कदमों का लक्ष्य एक आदर्श लक्ष्य है। सेहत के लिए इसके फायदे भी हो सकते हैं। लेकिन यह हर व्यक्ति के शरीर और आवश्यकता पर भी निर्भर करता है। अगर आपका काम मार्केटिंग या ऐसी ही किसी फील्ड से जुड़ा है तो आपके लिए इसके आधे कदम भी काफी होंगे। खासतौर पर लम्बे समय तक बैठे रहने वाले लोगों के लिए दस हजार कदमों का यह लक्ष्य ठीक हो सकता है। लेकिन इसके साथ भी सही और संतुलित डाइट तथा रेस्ट को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। युवाओं को ऐसा कोई भी लक्ष्य तय करने से पहले किसी विशेषज्ञ से राय लेकर अपने शरीर और दिनचर्या के हिसाब से योजना बनानी चाहिए। डाइट, एक्सरसाइज और रेस्ट का संतुलन ही आपको सही और लाभदाई परिणाम दे सकता है।

तो आप भी जल्द शुरू कर दीजिये ब्रिस्क वॉक। ब्रिस्क वॉक के फायदों पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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Dr. Tushar Ghodke

Dr. Tushar Ghodke

 Physiotherapist, Gwalior