यूटेराइन पॉलिप्स: पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग नहीं है सामान्य

by | Feb 22, 2020 | Gynaecological Problems, Self Care | 0 comments

देखने में आ रहा है कि आजकल गायनाकॉलिजिकल प्रॉब्लम्स बहुत ज़्यादा बढ़ रही हैं। क्योंकि हम ऐसे परिवेश में रह रहे हैं जो साधारण नहीं कही जा सकती है। कब कौन-सी समस्या हमारे सामने आकर खड़ी हो जाये कह नहीं सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि हम हर समय सतर्कता को बनाए रखें। महिलाएं वैसे भी अपने स्वास्थ्य को लेकर जागृत नहीं होती हैं। लेकिन जब समस्या हो जाती है, तब पछताती हैं। अब जैसे आप यूटेराइन पॉलिप्स को ही ले लीजिये। जी हां आज अनेक महिलाएं इस बीमारी से जूंझ रही हैं। इसलिए ये जानना ज़रूरी है कि ये आखिर कौन-सी बीमारी हैं? डॉक्टर्स के अनुसार इसमें किसी महिला के यूट्रस में पॉलिप्स का निर्माण होता है। इसके कारण उसे पीरियड्स में बहुत हैवी ब्लीडिंग होती है। ऐसा माना जाता है कि ये समस्या मेनोपॉज़ में अधिक देखने में आती है। इसे पीएपी स्मीयर टेस्ट और सोनोग्राफी के द्वारा जांचा जा सकता है। हिस्टोरस्कोपी के ज़रिये इस बीमारी का उपचार किया जा सकता है। आइये इस बारे में आपको और भी जानकारी दें।

क्या है यूटेराइन पॉलिप्स?

आपको बता दें कि यूटेराइन पॉलिप्स महिलाओं से जुड़ी एक समस्या होती है। इसमें किसी महिला के यूट्रस में पॉलिप्स हो जाते हैं। जिससे महावारी के दौरान उसे बहुत हैवी ब्लीडिंग होती है। वैसे तो ऐसा माना जाता है कि ये पॉलिप्स नॉन कैंसरस होते हैं। लेकिन कभी-कभी ये कैंसर का रूप भी ले सकते हैं। वास्तव में यूटेराइन पॉलिप्स यूट्रस में होने वाली टिश्यू ग्रोथ होती है। जो पीरियड साइकिल को प्रभावित करती है। इसलिए इस परिस्थिति को अनदेखा न करते हुए डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं।

किन कारणों से होता है यूटेराइन पॉलिप्स?

अब देखने वाली बात ये है कि यूटेराइन पॉलिप्स होता क्यों है? ज़ाहिर है आम महिला को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। डॉक्टर्स के अनुसार इस बीमारी का कारण हॉर्मोनल असंतुलन भी हो सकता है।  यदि किसी कारण शरीर में एस्ट्रोजन होर्मोन की मात्रा बढ़ती है तो यूटेराइन पॉलिप्स की स्थिति निर्मित हो सकती है।

पूरे शरीर में कहीं भी बन सकते हैं पॉलिप्स

मेडिकल साइंस के मुताबिक हमारे शरीर में पॉलिप्स कहीं भी बन सकते हैं। इसकी वजह से सम्बंधित स्थान पर परिचालन के स्तर पर कुछ गड़बड़ हो सकती है। ये पॉलिप्स शरीर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं। इनके बारे में तो व्यक्ति को कोई जानकारी नहीं होती है। केवल ज़रूरी जांचों के द्वारा ही पॉलिप्स का पता लगाया जा सकता है।

हैवी ब्लीडिंग के रूप में सामने आते हैं लक्षण

इसके बारे में हम आपको पहले भी जानकारी दे चुके हैं। जी हां हैवी ब्लीडिंग इस समस्या में सबसे आम लक्षण होता है। इसके चलते महिलाओं में बहुत अधिक कमज़ोरी आ जाती है। ये हैवी ब्लीडिंग पीरियड्स के बाद भी हो सकती है। ऐसे में आप घबराएं नहीं, किसी डॉक्टर से जल्दी से जांच करवाएं।

पीएपी स्मीयर टेस्ट से पता चलता है इस बीमारी का

यदि इस बीमारी को जानना है तो इसके लिए पीएपी स्मीयर टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है। पीएपी स्मीयर टेस्ट के अलावा सोनोग्राफी भी करवाई जा सकती है। पीएपी स्मीयर टेस्ट शरीर के अंदर मौजूद बदलाव की जानकारी आसानी से उपलब्ध करवा देता है।

मेनोपॉज़ के बाद बढ़ जाती है इस बीमारी की आशंका

किसी महिला में मेनोपॉज़ के बाद यूटेराइन पॉलिप्स की आशंका बढ़ती है। क्योंकि मेनोपॉज़ में हॉर्मोंस में बहुत जल्दी बदलाव होते हैं। यदि आप भी मेनोपॉज की अवस्था से गुज़र रही हैं तो अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रखें।

हिस्टोरस्कोपी एकमात्र इलाज है इस बीमारी का

आपको यदि यूटेराइन पॉलिप्स का उपचार जानना है तो हिस्टोरस्कोपी पर विचार करें। जी हां हिस्टोरस्कोपी एक तरह की सर्जरी होती है।  जिसमें एंडोस्कोपी की मदद से गर्भाशय की सर्जरी की जाती है। आजकल निसंतानता के लिए भी हिस्टोरस्कोपी बहुत अधिक लोकप्रिय हो रही है। इसकी मदद से पॉलिप्स को निकाल दिया जाता है। जिससे आपको जो भी तकलीफ हो रही है उससे आराम मिलता है।

तो आप भी इस तरह की किसी समस्या को अनदेखा न करें और तुरंत इसका उपचार करवाएं। यूटेराइन पॉलिप्स पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर ज़रूर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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