हार्ट प्रॉब्लम से जुड़े कुछ अनजाने फैक्ट

by | Jun 20, 2020 | Heart Problems, Self Care | 0 comments

हार्ट प्रॉब्लम्स के मामले जिस तरह से हमारे देश में बढ़ रहे हैं वो चिंता का विषय है। आजकल तो कम उम्र के लोग भी इसकी जद में आ रहे हैं। क्योंकि कुछ ऐसे फैक्ट्स सामने आ रहे हैं जो आपको चौंका देंगे। क्या आप जानते हैं कि माइग्रेन से लेकर प्रेग्नेंसी तक हार्ट प्रॉब्लम से जुड़ी वजह बन सकती है। यही नहीं इंसोम्निया भी इसका एक पक्ष हो सकता है। आइये इस बारे में विस्तार से जानें।

किस तरह की हो सकती हैं हार्ट प्रॉब्लम?

हार्ट प्रॉब्लम या दिल की बीमारियां दिल से संबंधित समस्याओं का एक समूह है। इनमें से कुछ समस्याएं हृदय की मांसपेशियों से जुड़ी हो सकती हैं, कुछ वॉल्व से, आर्टरीज से, ब्लड वेसल्स से या हृदय के अन्य अवयवों से जुड़ी हो सकती हैं। कहने का अर्थ है कि हार्ट प्रॉब्लम एक जैसी नहीं होती। ये किसी भी कारण से हो सकती है। भोजन की अनियमितता और गलत भोजन, हाई ब्लड प्रेशर, संक्रमण, एक्सरसाइज़ की कमी और धूम्रपान या जन्मगत विकार अक्सर इन समस्याओं का कारण बनते हैं। इसलिए जीवनशैली का नियमित और संतुलित होना बहुत ज़रूरी है।

चौंकाने वाले कारण होते हैं हार्ट प्रॉब्लम के

आम कारणों के अलावा कई बार कुछ ऐसे भी कारण हृदय संबंधी समस्याओं के पीछे की वजह बन सकते हैं जिनके बारे में आपने सोचा न हो। एक व्यक्ति जब हार्ट प्रॉब्लम से ग्रस्त होता है तो वो इसके बारे में सोचता है। लेकिन उसे कारण समझ नहीं आता। कुछ विशेष स्थितियां हो सकती हैं जो पढ़ने-सुनने में अजीब लग सकती हैं लेकिन असल में कई बार गंभीर बनकर सामने आ सकती हैं।

अधिक शोर का होना

ये बात चाहे थोड़ी अजीब लगे लेकिन ट्रैफिक का शोर यात्रा के दौरान होने वाला शोर आपके दिल की धड़कनों को बढ़ा सकता है। शोध की मानें तो इससे आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और कुछ मामलों में हार्ट फेलियर तक की स्थिति बन सकती है। आपने कमज़ोर दिल वाला जुमला तो सुना हो होगा। यह याद रखें कि शोर में होने वाली हर 10 डेसीबल की बढ़ोत्तरी, हृदय रोग और स्ट्रोक की आशंका को बढ़ा सकती है। इसी तरह वायु प्रदूषण का स्तर ऊंचा होने से भी हार्ट अटैक की स्थिति बन सकती है। वे लोग जो रोज़ बड़ी मात्रा में प्रदूषित हवा फेफड़ों से अंदर ले जाते हैं उनमें धमनियों में ब्लॉक होने या अन्य हृदय रोग होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। जो लोग रोज़ ट्रैफिक जाम में फंसते हैं उनमें यह आशंका और भी बढ़ जाती है क्योंकि यहां प्रदूषित वायु के साथ-साथ जाम में फंसने का गुस्सा, चिड़चिड़ाहट, फ्रस्ट्रेशन आदि भी उभरने लगता है। ऐसे में हृदय को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से किसी अनियमितता से गुज़र रहे हैं।

माइग्रेन भी बन सकता है दिल की बीमारी का कारण

वैसे तो हम माइग्रेन को इतना सीरियसली नहीं लेते हैं। इस बात को लेकर हालांकि विशेषज्ञ यह सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं कि ऐसा क्यों होता है लेकिन माइग्रेन होने की स्थिति में स्ट्रोक, सीने में दर्द और हार्ट अटैक की आशंका अधिक हो सकती है, विशेषकर ऑरा युक्त माइग्रेन होने पर। वहीं यदि आपके परिवार में पहले से कोई हृदय रोग का शिकार है या आप स्वयं किसी प्रकार की हृदय संबंधी अनियमितता से गुज़र रहे हैं तो माइग्रेन के लिए दवाई लेने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। क्योंकि माइग्रेन की कुछ दवाएं खून की नलियों को संकरा कर सकती हैं। लेकिन हर माइग्रेन वाला हार्ट प्रॉब्लम का शिकार हो ज़रुरी नहीं।

प्रेग्नेंसी भी हो सकती है वजह

यह बात माता-पिता दोनों पर लागू होती है। यही नहीं पैरेंट्स के हृदय रोग से ग्रसित होने की आशंका हर बच्चे के जन्म के साथ बढ़ भी सकती है। इसके पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं लेकिन खासकर मां के संदर्भ में आशंका के बढ़ने के पीछे विशेष कारण हो सकते हैं। वे महिलाएं जिनका मासिक चक्र 12 वर्ष की उम्र के पहले प्रारम्भ हुआ हो और मेनोपॉज 47 की उम्र तक या इसके पहले हो गया हो, उनमें स्ट्रोक या हृदय रोग होने की आशंका बढ़ सकती है। गर्भपात होने या ओवरीज़ अथवा यूटेरस के निकाल दिए जाने की स्थिति में यह आशंका और भी बढ़ सकती है। देखा जाता है कि प्रेग्नेंसी में भी शरीर में अनेक बदलाव होते हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी को भी दिल की बीमारी का एक कारण माना जा सकता है।

कद कम होना

यूं कद का मिलना प्रकृति पर निर्भर करता है और केवल यही मापदंड नहीं होता हृदय रोग की आशंका का लेकिन औसत कद से प्रत्येक 2.5 इंच कमी आने के साथ ही हृदय रोग की आशंका 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती। छोटे कद वाले लोगों में अक्सर कोलेस्ट्रॉल तथा ट्राईगिल्सराइड का स्तर भी अधिक होता है।

इंसोम्निया भी आपको दे सकता है दिल की बीमारी

रोजाना अगर नींद की कमी होगी तो व्यक्ति दिनभर उनींदा, चिड़चिड़ा और थका हुआ महसूस करेगा। इससे हार्ट अटैक की आशंका भी बढ़ सकती है। इसका मतलब इंसोम्निया के मरीज़ के लिए ये एक खतरे की घंटी है। क्योंकि इंसोम्निया के कारण व्यक्ति 3 से 4 घंटे ही सो पाता है। एक शोध के अनुसार वे लोग जो रोजाना 6 घंटे से भी कम समय सोते हैं उन्हें रोज 6-8 घंटे सोने वालों की तुलना में हार्ट अटैक का दुगुना खतरा होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और शरीर में अंदरूनी इन्फ्लेमेशन यानी सूजन का खतरा भी बढ़ सकता है जो दिल पर बुरा असर डालता है। इसलिए समय रहते इंसोम्निया का उपचार अवश्य करवाएं।

सर्दी-जुकाम या फ्लू

ज़ुकाम अपने आप में यह एक समस्या तो है ही। इस स्थिति में जब प्रतिरोधक तंत्र बाहरी हमले से लड़ रहा होता है तब शरीर में अंदरूनी इन्फ्लेमेशन (सूजन) पैदा हो सकती है जो दिल और धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती है। शोध बताते हैं कि वे लोग जिन्हें सांस संबंधी संक्रमण अधिक होते हैं उन्हें भी हार्ट अटैक होने की आशंका बाकी लोगों की तुलना में दुगुनी हो सकती है। वहीं अस्थमा से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक की आशंका 70 प्रतिशत तक बढ़ सकती है यदि वे सही इलाज और सावधानी नहीं अपनाते तो।

सुबह उठना

एक बहुत ही आम प्रक्रिया। रात-भर की नींद के बाद सुबह उठ जाना स्वाभाविक है लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस समय भी हार्ट अटैक होने की आशंका आम हो सकती है। असल में आपको नींद से उठाने के लिए दिमाग शरीर में ढेर सारे हार्मोन्स की बाढ़ ला देता है। इससे दिल पर अतिरिक्त भार आ जाता है। यही नहीं रात भर सोने के कारण शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन की सी स्थिति) भी होती है तो हृदय को काम करने में और मुश्किल आती है। ऐसे में खतरा पैदा हो सकता है।

अन्य कारण

इन सबके अलावा अचानक बहुत अधिक ख़ुशी या दुख मिलना, किसी हादसे जैसे भूकंप का आना, किसी प्रतियोगिता के दौरान उत्तेजना का बढ़ जाना या शराब ही नहीं कॉफी की भी लत हृदय के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

बचने का उपाय

सबसे पहली चीज है दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित दिनचर्या, सही खान-पान और एक्सरसाइज को अपनाना। इसके बाद यदि परिवार में किसी को पहले से हृदय संबंधी कोई समस्या है तो आवश्यक रूप से नियमित अंतराल से अपनी जांच करवाएं। ऊपर दर्शाई गई स्थितियां बहुत आम हैं लेकिन इनसे दिल को नुकसान पहुंचने की आशंका तब अधिक बढ़ जाती है जब दिल किसी समस्या में होता है और उसके स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखा जाता। हृदय के स्वास्थ्य को लेकर यदि सतर्कता रखी जाए तो अधिकांश समस्याओं से बचा जा सकता है।

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