इनफर्टिलिटी दे सकती है थायरॉइड की समस्या

by | Dec 23, 2019 | Infertility, Thyroid | 0 comments

आज के समय में लड़कियों और महिलाओं में थायरॉइड की समस्या अधिक देखी जा रही है। बात यहां तक तो ठीक है। लेकिन जब थायरॉइड इनफर्टिलिटी का कारण बन जाये तब? है ना ये चिंता की बात। संतान का सुख हर कोई लेना चाहता है। कभी-कभी कुछ कारणों से व लापरवाहियों के चलते छोटी-सी समस्याएं बड़ा रूप धारण कर लेती हैं। थायरॉइड होने पर दिमाग में दो ही बातें आती हैं। पहली इस बीमारी से ग्रस्त आदमी या मोटा होता है और दूसरी या पतला। लेकिन आपको बता दें कि थायरॉइड का संबंध इनफर्टिलिटी से भी होता है। इस बीमारी से ग्रसित होने की प्रवृत्ति महिलाओं में पुरूषों से चार गुना अधिक होती है। हाइपोथायरॉइडिज़्म की अवस्था भी महिलाओं के लिए ठीक नहीं होती है। चिकित्सकों का मानना है कि इस बीमारी को नज़रअंदाज करना सही नहीं है। समय रहते थायरॉइड ट्रीटमेंट का इंतज़ाम होना चाहिए। हालांकि आज की जीवनशैली में थायरॉइड की बीमारी कॉमन है। आइये इस बारे में आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर श्वेता गोस्वामी से जो जेपी व क्लाउड नाइन हॉस्पिटल, नोयडा में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवायें दे रही हैं।

इनफर्टिलिटी के बारे में जानकर ऐसा लगा कि खत्म हुई दुनिया

30 वर्षीय गीतांजलि चोपड़ा एक कामकाजी महिला है। इस कम उम्र में जब उन्होंने जाना कि वह गर्भधारण नहीं कर सकती, तो लगा कि दुनिया खत्म हो गई। उन्हें थायरॉइड की शिकायत थी, लेकिन इसे उन्होनें तवज्जो नहीं दी। एक साल बाद उन्होनें जब टीएसएच ब्लड टेस्ट करवाया, तो वह हाइपोथायरॉइडिज़्म की बीमारी से ग्रस्त थीं। इससे वह गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं। 80 फीसदी स्टैडर्ड थायरॉइड ब्लड टेस्ट भी लो ओवेरियन टिश्यू का स्तर बताने में सफल नहीं होते हैं। ऐसे में महिलाओं और युवतियों को अनुभवी और योग्य फिज़िशियन के पास जाना चाहिए। जिसे इस बात की जानकारी हो कि स्टैडर्ड टेस्ट भी अक्सर लो ओवेरियन थायरॉइड के स्तर को नहीं जांच पाते।

धीरे-धीरे बढ़ती है इनफर्टिलिटी की समस्या

जी हां जब भी किसी महिला को हाइपोथायरॉइडिज़्म की समस्या होती है तो एकदम से इनफर्टिलिटी नहीं होती। इनफर्टिलिटी की समस्या तब बनती है जब आप इसका अच्छे से इलाज नहीं करवाती हैं। वैसे थायरॉइड के कारण पुरुषों में भी इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है। लेकिन फिर भी ऐसे मामले कम देखने में आते हैं।

क्या है हाइपोथायरॉइडिज़्म?

थायरॉइड हॉर्मोन के अंडर एक्टिव होने से पर्याप्त मात्रा में महत्वपूर्ण हॉर्मोन निकलते हैं। महिलाओं के लिए ये स्थिति हाइपोथायरॉइडिज़्म और इनफर्टिलिटी के बीच का लिंक है। इससे ओवेल्यूशन प्रकिया में बाधा आती है। इसलिए हाइपोथायरॉइडिज़्म का इलाज आप ज़रूर करवाएं। क्योंकि आपकी अनदेखी आपको मातृत्व से वंचित कर सकती है।

इन लक्षणों के दिखने पर हो जाएं सतर्क

हाइपोथायरॉयडिज़्म के कई प्रकार होते हैं। कुछ मरीजों में ऐसा भी होता है कि इसके लक्षण ही समाने नहीं आते। वहीं कुछ मरीजों में कुछ सामान्य लक्षण दिखाई पड़ते हैं। विशेषतः लक्षण मरीज में हॉर्मोन की कमी के स्तर पर विकसित होते हैं। शुरुआती दौर में लक्षण तीव्र नहीं होते। लेकिन धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं और खतरनाक स्तर तक पहुंच जाते हैं। सामान्य लक्षणों में वज़न बढ़ना, थकान, कब्ज़, मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द, ठंड सहन न कर पाना शामिल हैं। इसके अलावा अनियमित मासिक धर्म, नींद न आना, सुस्ती, शुष्क त्वचा, बाल पतले होना, खुरदुरे होना शामिल हैं।

तुरंत करवाएं थायरॉइड ट्रीटमेंट

लक्षण दिखाई देने पर तुरंत थायरॉइड स्टिम्यूलेटिंग हॉर्मोन टेस्ट, चेस्ट एक्सरे, टी-4 और थायरोक्सिन टेस्ट करवाना चाहिए। चिकित्सक मरीज़ की आयु, थायरॉइड ग्रंथि के लक्षण देखकर इसका उपचार करते हैं। इसके लिए थायरॉइड रिप्लेसमेंट टेस्ट प्रभावकारी है। इस हॉर्मोन के सामान्य होने में एक दो महीने का समय लगता है। इसमें ताउम्र दवाइयां और प्रत्येक छह महीने में थायरॉयड चेक करवाना ज़रुरी है। जो लोग समय पर थायरॉइड ट्रीटमेंट करवा लेते हैं उन्हें जल्दी आराम भी मिल जाता है। सही थायरॉइड ट्रीटमेंट के साथ संतुलित दिनचर्या और पौष्टिक खान-पान लेने से ये समस्या जड़ से खत्म हो सकती है। लेकिन ज़रूरी है कि आप इस रोग को बढ़ने न दें। समय पर थायरॉइड ट्रीटमेंट करवा के अपने जीवन को सुखमय बनायें।

विश्व पर इनफर्टिलिटी मेडिकल, सोशल और साइकोलॉजिकल भार स्वरुप है। 18 से 20 फीसदी दंपती रिप्रोडेक्टिव उम्र में भी इनफर्टिलिटि के शिकार होते हैं। थायरॉइड हॉर्मोन सेल्युलर फंक्शन को नियमित करता है। इसका अनियमित होना फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। थायरॉइड का पता चलना और अनुउपचारित रहना इनफर्टिलिटी को और गर्भपात को निमंत्रण देता है। भारतीय थायरॉइड सोसायटी के मुताबिक प्रीमेंस्ट्रचुएल सिंड्रोम, पीएमएस वाली 70 फीसद महिलाओं में थायरॉइड का स्तर कम होता है। इससे ओवरी से होने वाले प्रोजेस्टरॉन का स्त्राव कम होता है। इंडियन थायरॉइड सोसाईटी के अनुसार भारत की 25 फीसद जनसंख्या थायरॉयड के सही से काम न करने की समस्या से ग्रस्त है।

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थायरॉइड और इनफर्टिलिटी से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए हमारे हेल्थ A-Z सेक्शन को ज़रूर देखें। इसी तरह की अन्य किसी जानकारी के लिए वामा टुडे के हेल्थ सेक्शन को भी ज़रूर विज़िट करें।

Dr. Shweta Goswami

Dr. Shweta Goswami

IVF Expert, Gynecologist Expert

JP & Cloud Nine Hospital, Noida