जॉन्डिस: उपचार में देर हो सकती है प्राणघातक

by | Aug 21, 2019 | Liver, Therapy | 0 comments

लिवर हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। इसमें किसी भी तरह की समस्या का होना बड़ी मुसीबत को आमंत्रित करता है। जॉन्डिस मतलब की पीलिया ऐसी ही एक समस्या है। इसमें हमारा लिवर बहुत ज़्यादा कमज़ोर हो जाता है। ग्रीष्म ऋतु व वर्षा ऋतु में पीलिया आमतौर पर अपनी चुंगल में मानव जाति को जकड़ता है। यकृत की क्रिया बिगड़ जाने पर जब पित्त भली-भांति अवशोषित नहीं होता, तब पीलिया उत्पन्न होता है। पीलिया एक कष्टदायक रोग होता है और यदि चिकित्सा में विलम्ब किया जाए तो यह प्राणघातक भी हो सकता है। लेकिन जॉन्डिस सिम्पटम्स को जानकर सही समय पर उपचार करवाया जाये व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो जाता है। लोग इस संबंध में बहुत अधिक लापरवाही करते हैं। इसके कारण स्थिति बिगड़ती है। आइये इसके उपचार के संबंध में आपको जानकारी दी जाये।

क्या होता है जॉन्डिसॽ

पीलिया रोग में पित्त रस में मिल जाता है जिससे पूरा शरीर पीला पड़ने लगता है। रोगी के शरीर की चमड़ी का रंग पीला हो जाता है। रोगी की आंखें तथा हाथ के नाखून आदि भी पीले पड़ जाते हैं। यह रोग यकृत (लिवर) की खराबी से होता है। सामान्य स्थिति में खून में पित्तरंजक का स्तर 1 प्रतिशत या इससे कम होता है। जब यह संक्रमण बढ़कर 2.5 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तब जटिलताएं प्रारम्भ हो जाती हैं। पित्ताशय से निकलकर आंत में आने वाली पित्त नलिका के मार्ग में अवरोध होने से जॉन्डिस होता है। इस रोग से पूरे बदन में थकान, सिरदर्द, बुखार, उल्टियां, अरुचि और अपच की शिकायत रहती है।

ऐसे होती है जॉन्डिस की उत्पत्ति

संक्रमित तथा दूषित वस्तु खाने से, मानसिक तनाव होने पर और दिन में सोने से अनेक समस्याएं होती हैं। इससे वात, पित्त, कफ मानव शरीर के रुधिर को बिगाड़ शरीर की त्वचा को पीला कर देती है। वैसे आपको ये बता दें कि दूषित खान-पान से भी ये रोग होता है। ये सभी संक्रमित चीज़ें आपके शरीर में पहुंचकर लिवर को क्षतिग्रस्त करती हैं।

पूर्व रूप के जॉन्डिस सिम्पटम्स पूर्व रूप के जॉन्डिस सिम्पटम्स 

आपको बता दें कि कुछ ख़ास जॉन्डिस सिम्पटम्स को जानकर आप इसे जल्दी ठीक कर सकते हैं। जब त्वचा फटने लगे, अंग में पीड़ा हो, मिट्टी खाने की इच्छा रहे, नेत्रों पर सूजन हो। इसके अलावा मल तथा मूत्र पीले हों, अन्न पचे नहीं, यह जॉन्डिस सिम्पटम्स होते हैं। जब स्थिति बिगड़ने लगती है तो पूरे शरीर में पीलापन बढ़ता है। जॉन्डिस सिम्पटम्स में सबसे ज़्यादा हमारे डाइजेशन संबंधी विकार सामने आते हैं।  

पीलिया रोग में आहार 

• गेहूं, जौ, या चने की रोटी खानी चाहिए। भूसी समेत आटे की रोटी लेना उचित रहता है।

• मूंग, मसूर, अरहर या कुलथी का सूप, चिकनाई निकाला हुआ गाय का दूध। पतला दलिया, पतली खिचड़ी, ठीक से पका हुआ चावल।

• हरी पत्तियों वाली सब्ज़ी यथा पालक, बथुआ, मैथी, मूली, पपीता। 

• गाय के दूध से बना हुआ पतला दही, ताज़ा फल, फलों का रस, छाछ। 

इन चीज़ों को जॉन्डिस में न करें प्रयोग 

1. उड़द की दाल का सेवन निषेध है।

2. वसा नाम मात्र भी हानिकारक हो सकता है।

3. बाज़ार का भोजन न करें।

4. कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, सिगरेट व अन्य नशा जानलेवा हो सकता है।

5. पित्त को सृजित करने वाली चीज़ों और कब्ज़ पैदा करने वाली चीज़ों का सेवन वर्जित है।

आयुर्वेद में जॉन्डिस के उपचार

• आंवला, लौहभस्म, सौंठ, कालीमिर्च, पीपल और हल्दी की समान मात्रा कूट-पीस लें। एक चम्मच चूर्ण सुबह-सायं घी व शहद में मिलाकर चाटने से शीघ्र ही जॉन्डिस नष्ट हो जाएगा। 

• सफेद भांगरा के पूरे पौधे को जड़ सहित छाया में शुष्क कर, चूर्ण बना लें। उसमें बराबर की मात्रा में त्रिफला चूर्ण मिला लें, तत्पश्चात मिश्रण के बराबर मिश्री मिला लें। यह मिश्रण 20 ग्राम शहद या पानी के साथ दिन में 3 बार खाने से पीलिया रोग मिटता है।

• चंदन 5 ग्राम, आम्बा हल्दी 6 ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया नष्ट होता है।

• पंचामृत लौह मन्डूर की दो गोली तालमखाने क्वाथ के साथ दिन में दो बार सेवन करें। इससे जॉन्डिस में आराम मिलता है। 

सावधानियां 

1. खाना बनाने का स्थान व रखने का स्थान साफ होना चाहिए। खाद्य पदार्थ मक्खियों व अन्य जीव-जन्तुओं की पहुंच में नहीं होना चाहिए व धूल भी नहीं आनी चाहिए।

2. भोजन बनाने व परोसने से पहले भली-भांति हाथ साबुन से धोकर स्वच्छ कर लेने चाहिए।

3. ताज़ा भोजन होना चाहिए और साफ स्थान पर बैठकर शांतचित्त से धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए।

4. असावधानी व असुरक्षित यौन संबंध नहीं करना चाहिए। यह भी पीलिया का कारण हो सकता है। 

5. उबालकर रखा हुआ पानी पीने से बचाव होता है। 

तो इस तरह से आप भी जॉन्डिस से अपना बचाव कर सकते हैं। जॉन्डिस पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें। 

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