नज़रअंदाज़ न करें ओवर वेट को, हो सकती हैं ये बीमारियां

by | Jun 19, 2020 | Diet & Fitness, Obesity | 0 comments

ओबेसिटी या वेट लॉस की जर्नी एक पेचिदा मामला है। हालांकि आपके पास अपने वज़न को कम करने के अलावा कोई और सुरक्षित विकल्प नहीं रहता है। ओवर वेट हर तरह से नुकसानदायक है। यह शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचाता है। यही कारण है कि दुनियाभर में मोटापे को लेकर विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। डायबिटीज़ से लेकर स्ट्रेस जैसी स्थिति तेज़ी से बढ़ रही है। खासकर बच्चों और युवाओं में यह कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। मोटापे से किस तरह की बीमारियां हो सकती हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है? इस बारे में जानकारी दे रहे हैं- डॉ. विक्रम सिंह चौहान, जो जबलपुर में बतौर एंडोक्राईनोलॉजिस्ट अपनी सेवायें दे रहे हैं।

ओवर वेट से बढ़ती समस्याएं

मोटापे के महामारी के तौर पर सामने आने के पीछे एक बड़ा कारण है, जीवनशैली, डाइट और दिनचर्या में बड़े बदलाव। पैक्ड और जंक फूड आज लोगों के भोजन का मुख्य ज़रिया बन रहे हैं, मोबाइल और कम्प्यूटर जैसे गैजेट्स उनकी शारीरिक गतिविधियों को कम कर रहे हैं। देर रात को सोना और सुबह देर से जागना अब बच्चों के भी रूटीन का हिस्सा बन चुका है। यही सब कारण है कि कम उम्र से शरीर पर अतिरिक्त चर्बी की परतें चढ़नी शुरू हो जाती हैं जो आगे जाकर गंभीर शारीरिक स्थितियों का कारण बनती हैं। ओवर वेट के कारण हाई बीपी से लेकर डायबिटीज़, हृदय रोग, कुछ प्रकार के कैंसर, ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी हड्डियों की तकलीफों की आशंका अधिक बढ़ जाती है। हम भारतीयों में ये समस्याएं आमतौर पर अधिक देखने को मिलती हैं और इनका प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है।

आसान नहीं होता ओवर वेट को कम करना

एक बार आपका वज़न बढ़ जाये तो उसे कम करना टेढ़ी खीर है। ओवर वेट को कम करने के लिए बहुत मेहनत करना पड़ती है। इसके लिए न केवल आपको रेग्युलर एक्सरसाइज़ बल्कि डाइट पर भी ध्यान देना पड़ता है। मोटापा बढ़ने का पता नहीं चलता लेकिन कम करते समय भगवान याद आ जाते हैं। लेकिन मोटापे के साथ जीना भी किसी सज़ा से कम नहीं है।

मुसीबत बन चुके हैं हमारी डाइट में आये ये बदलाव

पहले के हमारे आदर्श जीवन से जुड़े कुछ पहलू होते थे। जैसे सादा जीवन उच्च विचार। इसमें सात्विक भोजन का भी बड़ा स्थान होता था। हमारे यहां (भारत में) कई लोगों के दिमाग में यह प्रश्न आता है कि दुनिया के कई देश ऐसे हैं जो नूडल्स, पिज्जा, ब्रेड और बड़ी मात्रा में सॉफ्टड्रिंक्स या मीठी चीजों का सेवन करते हैं उनको नुकसान नहीं होता, फिर हमें क्यों? लेकिन अब हमारी डाइट का जो पैटर्न है वो बहुत डरावना है। इससे घबराना चाहिए। डाइट में कुछ बदलाव करके भी हम ओवर वेट से निजात पा सकते हैं। यहां कुछ बातों को ध्यान में रखना ज़रूरी है-

• अन्य नस्लों की जेनेटिक स्थिति
• खान-पान के अलावा उनका नियमित व्यायाम करना या किसी न किसी खेल से अनिवार्य तौर पर जुड़े रहना
• उनके द्वारा ज़्यादा मात्रा में सब्जियों, फलों और सलाद का उपयोग, आदि

इसके बावजूद विदेशों में भी मोटापा महामारी के रूप में सामने आ रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन में तो बकायदा इसपर नियंत्रण के लिए सरकारों द्वारा अभियान चलाये गए हैं। इसलिए ये सोचना गलत है कि उन्हें इस तरह के भोजन से समस्या नहीं होती।

भारतीयों का भोजन

अधिकतर विशेषज्ञ आजकल भरपूर फाइबर, पोषक तत्वों और गुणों से भरपूर शाकाहारी भोजन को अच्छी डाइट में शामिल करते हैं। एक सामान्य शाकाहारी थाली में भी यह सब गुण मिल सकते हैं लेकिन मुश्किल यह है कि हम भारतीय अधिकांशतः इस तरह की संतुलित डाइट का पालन नहीं करते। हमारी डाइट में नुकसानदायक सिम्पल कार्बोहाइड्रेट्स का प्रतिशत अधिक होता है। खासकर आज की बदली जीवनशैली में हम भोजन संबंधी कई गलतियां कर रहे हैं, जैसे-

• जंक फूड, पैक्ड फूड और शकर युक्त पदार्थों का अधिक उपयोग
• अधिक तला और गरिष्ठ मसालेयुक्त रेस्टोरेंट का भोजन
• किसी भी समय कुछ भी खा लेने की आदत जैसे देर रात पिज्जा या बर्गर खाना या भूख के समय न खाने की आदत जैसे ब्रेकफास्ट को टाल देना, आदि
• टीवी देखते समय, बच्चों को नाश्ता देते समय बड़ी मात्रा में फ्लेवर्ड जूस, आइसक्रीम, कुकीज, चिप्स आदि का प्रयोग

ये या ऐसी कई अन्य आदतें मोटापे की समस्या को तेज़ी से बढ़ा रही हैं।

भारतीयों में बढ़ती डायबिटीज़ की समस्या

एक चौकाने वाले खुलासे में ये बात सामने आई है कि कुछ सालों में भारत में डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्या सबसे ज़्यादा होगी। यहीं नहीं बच्चों में भी डायबिटीज़ की समस्या बढ़ती जा रही है। इसका मुख्या कारण है मोटापा। मोटापे के बढ़ने या शरीर में चर्बी के संग्रहण का तरीका अलग-अलग हो सकता है। हम भारतीयों को सबसे अधिक प्रभावित करता है पेट का मोटापा या सेंट्रल ओबेसिटी। इसे और भी गहराई से समझा जा सकता है। मुख्यतः दो प्रकार से फैट व्यक्ति में होते हैं, पहला विसरल और दूसरा सबक्यूटेनियस। विसरल फैट वह है जो शरीर के अंदर अंगों के आस-पास जमा हो जाता है जबकि सबक्यूटेनियस फैट वह है जो त्वचा के ठीक नीचे नज़र आता है। आमतौर पर सबक्यूटेनियस फैट खतरनाक नहीं होता, बल्कि इसके कुछ फायदे भी हो सकते हैं। जबकि विसरल फैट नुकसानदायक होता है। अब गंभीर बात यह है कि भारतीयों में विसरल फैट का प्रतिशत अधिक होता है। ये फैट डायबिटीज़ की वजह बन सकता है। इसी तरह मोटापा भी दो तरह होता है- सेंट्रल ओबेसिटी यानी पेट का मोटापा और पेरिफेरल बोसेटी यानी कूल्हों, जांघों आदि पर दिखाई देने वाला मोटापा। इसमें भी सेंट्रल ओबेसिटी अधिक नुक्सानदायक होती है और भारतीयों में यह अधिक पाई जाती है।

आसान बचाव

एक नियमित और पौष्टिक डाइट से भरपूर जीवनशैली मोटापे से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण मन्त्र है। शारीरिक श्रम या व्यायाम की आदत का कम उम्र से साथ होना, भरपूर फल-सब्जियां खाना, किसी भी एक स्पोर्ट को जीवन का हिस्सा बनाना, समय पर भोजन करना और सोना-जागना और मानसिक तनाव कम करना, ये कुछ चीज़ें हैं जो मोटापे और कई सारी बीमारियों की आशंका को कम से कम कर देती हैं। इसलिए आज से ही जागिये, बहाने बनाना छोड़िये और एक सही रूटीन का पालन कीजिये।

इन कुछ तरीकों से आप ओवर वेट से छुटकारा पा सकते हैं। बस आवश्यकता है मज़बूत इरादों की।

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ओबेसिटी से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए हमारे हेल्थ A-Z और डाइट एंड फिटनेस सेक्शन को ज़रुर देखें। इसी तरह की अन्य जानकारी के लिए वामा टुडे के फिटनेस सेक्शन को ज़रुर विज़िट करें।

Dr. Vikram Singh Chauhan

Dr. Vikram Singh Chauhan

Endocrinologist, Jabalpur