इन तरीकों से अपने ज़िद्दी बच्चे को कीजिये डिसिप्लिन

by | Dec 18, 2019 | Pregnancy & Parenting | 0 comments

प्रेग्नेंसी एंड पेरेंटिंग तक माता-पिता की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अब बात जब बच्चे की परवरिश को लेकर होती है तो अनेक समस्याएं आती हैं। बच्चों में डिसिप्लिन का होना बहुत ज़रूरी होता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर बच्चे के विकास में बाधा आना लाज़मी है। पेरेंट्स के सामने समस्या तब भी आती है जब बच्चा ज़िद्दी हो जाता है। चाइल्ड डेवलपमेंट में अभिभावकों की एक महती भूमिका होती है। अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे निभाते हैं।

शुरुआत से ही डालें डिसिप्लिन की आदत

वैसे तो बालकाल में सभी ज़िद्दी होते हैं। यह और बात है कि कुछ कम और कुछ अधिक। कभी-कभी तो स्थिति अनुकूल बनाने के प्रयास में पेरेंट्स बच्चों की ज़िद पूरी करते हैं। या फिर गुस्से में आकर बच्चों को पीट देते हैं। परन्तु व्यव्हार के क्रम में ये दोनों तरीके बच्चों को विकास में बाधक हैं। इसलिए ज़रूरी है कि बच्चों में शुरू से डिसिप्लिन की आदत डाली जाये।

बच्चों में डिसिप्लिन के कारण अच्छी आदतें विकसित होती हैं

जी हां अगर आपके बच्चे में शुरू से डिसिप्लिन है तो आगे का समय उनके लिए अच्छा होता है। डिसिप्लिन का मतलब पत्थर बन जाना नहीं है। डिसिप्लिन का अर्थ है अपने बच्चे के जीवन में संतुलित व्यवहार को शामिल करना। इसलिए अपने बच्चे को डिसिप्लिन से कभी दूर मत कीजिये।

चाइल्ड डेवलपमेंट के लिए भी ज़रूरी है डिसिप्लिन

बच्चों की ज़िद्द पूरी करने से वो और उदंड बनता है। दूसरी तरफ पिटाई के कारण चाइल्ड डेवलपमेंट भी रुक जाता है। बच्चे किसी हीन भावना से ग्रसित होकर चुपचाप बैठे रहते हैं। उनमें न किसी के प्रति आकर्षण होता है और न ही स्वस्थ कॉम्पिटीशन की भावना। नतीजतन चाइल्ड डेवलपमेंट में वह पिछड़ने लगता है। मनोवैज्ञानिक का कहना है बच्चों में हठ की प्रवत्ती न पनपे इसके लिए शुरुआती दौर से ही ध्यान दें। चाइल्ड डेवलपमेंट के लिए ज़रूरी है कि आप अच्छे पेरेंट्स बनें।

बच्चों को ज़िद्दी बनाने में आपका हाथ है

कई बार ऐसा होता है बच्चों को भूख लगी है और आप दोस्तों या फिर टीवी में व्यस्त हैं। भूखा बच्चा कुछ देर तो इंतज़ार करता है। परन्तु जब आप सुध नहीं लेते तो वह रोना-चिल्लाना शुरू कर देता है। अब आप भागी-भागी आती हैं और बच्चे को भोजन करवाती हैं। बस बच्चे में यहीं से आदत पड़ जाती है कि रोने के बाद ही किसी चीज़ की पूर्ती होती है। सजग पेरेंट्स बच्चों की आवश्यकता पर नज़र रखते हैं।

पेरेंट्स बहुत कठोर डिसिप्लिन में भी न रखें

ऐसा कई बार देखा गया है कि कठोर डिसिप्लिन में रहने वाले बच्चे अधिक ज़िद्दी हो जाते हैं। कारण यही होता है कि माता-पिता बच्चों को कल्पनाओं की संसार में ही जबरन घूमना चाहते हैं। नतीजन अपनी इच्छा की पूर्ति के अभाव में बच्चों की विरोधी प्रवृत्ति हो जाती है। पेरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चों के प्रति सहानुभूति रख कर उसके बाल मन को समझें।

ज़िद्दी बालक के पीछे पेरेंट्स का पछतावापूर्ण रवैया भी कभी-कभी मूल कारण बन जाता है।

यह सच है कि झंझट टालने की लिए उस वक्त बच्चे के मुख से जो कुछ निकला आप हां करते चले गए। परन्तु आप घर लौटते वक्त सारे वादे भूल चुके होते हैं। बच्चा जब अपनी इच्छाओं की पूर्ति होते नहीं देखता तो हठ में आसमान सर पर उठा लेता है। बच्चों के मनोभाव को समझना पेरेंट्स की ज़िम्मेदारी है। आपको अपना ये दायित्व अच्छे से निभाना चाहिए। अनुशासन बच्चे के जीवन में हो लेकिन ज़रूरी है कि पहले आप अनुशासन का पालन करें। जब बच्चा आपको देखेगा तो खुद ही आपका अनुसरण करने की कोशिश करेगा।

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