इन्फेंट केयर में ज़रूरी है डॉक्टर एडवाइस

by | Aug 8, 2019 | Pregnancy & Parenting | 0 comments

प्रेगनेंसी एंड पेरेंटिंग दोनों के लिए डॉक्टर की सलाह ज़रूरी होती है। खासकर हम बात करें इन्फेंट केयर की। जी हां बेबी केयर के लिए तो डॉक्टर एडवाइस पर अमल करना ही चाहिए। क्योंकि इसे कैसे ब्रैस्टफीडिंग करवाना हैॽ उसका वैक्सीनेशन कब-कब होना चाहिएॽ इन तमाम बातों पर आप डॉक्टर एडवाइस को फॉलो करें। आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

ज़रूरी होती है इन्फेंट की केयर

संतान के गर्भ में आने से लेकर उसके जन्म तक अनेक सावधानियों का पालन करना ज़रूरी है। लेकिन जन्म के बाद तो बेबी केयर और भी बड़ी ज़िम्मेदारी का रूप ले लेती है। पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के लिए बच्चे के पालन को लेकर बहुत से प्रश्न होते हैं। वह समझ ही नहीं पाती हैं कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। फिर परिवार के बड़े बुजुर्गों की सलाह को भी नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होता है। लेकिन बात अगर इन्फेंट के स्वास्थ्य से जुड़ी है तो सिर्फ डॉक्टर की एडवाइस ही मानें।

मां के लिए जानना ज़रूरी है इन्फेंट केयर से जुड़ी बातें

जी हां इन्फेंट केयर के लिए मां को समुचित जानकारी मेडिकल व पेरामेडिकल स्टाफ द्वारा दी जानी चाहिए। एक व्यवस्थित जानकारी शिशु के आगमन के बाद बेबी केयर को आसान बनाती है। बच्चे के केयर से जुड़ी एक-एक बात को ध्यान से समझें और याद रखें। जहां तक संभव हो सके, प्रसव हमेशा अच्छे अस्पताल में ही होना चाहिए। जिससे समय पर चिकित्सक और नर्स की सेवाएं मिल सकें। इससे जटिलताओं की आशंका कम हो जाती है।

ब्रैस्टफीडिंग का नहीं है कोई विकल्प

लोग आपको यह सलाह दे सकते हैं कि ब्रैस्टफीडिंग की जगह आप बाज़ार के दूध को प्राथमिकता दें। कारण कोई भी हो सकता है जैसे कि मां अपने फिगर के कारण ब्रैस्टफीडिंग न करवाये। या फिर ऑफिस जाने या काम की व्यस्तता हो। लेकिन यह बिल्कुल गलत है। बच्चे को ब्रैस्टफीडिंग करवाना बहुत ज़रूरी है। इससे बच्चा बहुत-सी बीमारियों से बचा रहता है। साथ ही मां भी स्तन कैंसर के ख़तरे से सुरक्षित रहती है। जन्म के बाद मां के स्तनों से आने वाला गाढ़ा और पीला दूध कोलोस्ट्रम कहलाता है। यह दूध प्रोटीन से भरपूर होता है। जो इन्फेंट की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जन्म के आधे घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध मिलना चाहिए। जीवन के पहले 6 महीनों तक बच्चे के लिए मां का दूध ही सम्पूर्ण आहार है। इस दौरान मां के दूध के अलावा कोई भी चीज न दें।

वैक्सीनेशन को भी साधारण तरीके से न लें

जन्म के तुरंत बाद शिशु को पोलियो की दवा, बीसीजी और हेपिटाइटिस का वैक्सीनेशन देना चाहिए। कई लोग वैक्सीनेशन को लेकर लापरवाही करते हैं। हो सकता है इससे आपके बच्चे को कोई समस्या हो जाये। इन्फेंट को ठंड से बचाने के लिए उसे पूरे कपड़े पहनाने चाहिए। कपड़ों के साथ ही उसे टोपी, ग्लव्ज़ और मोजे पहनाकर रखना चाहिए। बच्चे को मां के समीप रखना चाहिए, क्योंकि मां के शरीर से बच्चे को गर्मी मिलती है। साथ ही ध्यान रखें कि बच्चे के पास पूरी तरह से सफाई रहे। जिससे उसे इन्फेक्शन का खतरा कम से कम हो।

नवजात शिशु के वज़न के लिए डॉक्टर एडवाइस पर ध्यान दें

नवजात शिशु का वज़न निर्धारित होने के कई कारक होते हैं। ज़रूरी नहीं है कि सभी बच्चे जन्म के बाद एक ही वजन के हों। इसलिए अगर कोई आपसे अपने बच्चे का वज़न बताता है तो उसे बिलकुल भी गंभीरता से न लें। आपके विशेषज्ञ की राय ही सर्वोत्तम होती है। ऐसा करके आप अपने शिशु को हानि भी पहुंचा सकते हैं। एक बात जो सबसे ज़्यादा ज़रूरी है वो यह कि बच्चा स्वस्थ हो। अतिरिक्त आहार देकर उसका वजन बढ़ाने का कोई अर्थ नहीं है।

घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें

बच्चों को किसी तरह की समस्या होने पर अक्सर लोग घरेलू उपचार से उसे ठीक करने की कोशिश करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि छोटी-सी समस्या बहुत बड़ी बन जाती है। बच्चे के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न करें। कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर को दिखाएं।

बच्चे के जन्म के बाद कर्तव्यों की इतिश्री नहीं हो जाती है बल्कि आपकी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। एक नन्ही-सी जान को प्यार और एहतियात से संभालें और अपने दायित्व को निभाएं।

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