गर्भावस्था से जुड़ा पहलू है मॉर्निंग सिकनेस

by | Nov 30, 2019 | Pregnancy & Parenting | 0 comments

प्रेग्नेंसी और पेरेंटिंग सही मायनों में आपको जीवन के नए तज़ुर्बे सिखाते हैं। लेकिन ये बदलाव सबसे ज़्यादा किसी के लिए होता है तो वो है होने वाली मां। शारीरिक परिवर्तनों के साथ इस दौरान अनेक भावनात्मक पहलू भी महिला को छूते हैं। यही कारण है कि महिला कभी खुश होती है तो कभी उदास। गर्भावस्था में एक लक्षण और तेज़ी से सामने आता है। इसे मॉर्निंग सिकनेस के नाम से जाना जाता है। जी हां आपने भी शायद इस बारे में सुना हो। और साथ ही बहुत-सी महिलाओं ने इसे अनुभव भी किया ही होगा। आपको बता दें कि मॉर्निंग सिकनेस कोई बीमारी नहीं, बल्कि ये एक अवस्था है। इससे महिला को थोड़ी समस्या तो होती है, लेकिन कुछ समय बाद ये अपने आप ठीक भी हो जाती है। प्रेग्नेंसी में वैसे भी अनेक बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे आप हेल्दी डाइट ही लें। आपको अधिक मानसिक तनाव भी नहीं लेना चाहिए। मॉर्निंग सिकनेस में नौशिया, मितली आना, घबराहट होना एक साधारण बात है। इसलिए तो प्रेग्नेंसी एक महिला का दूसरा जन्म माना जाता है। आइये इस स्थिति के बारे में आपसे विस्तार से चर्चा करें।

हर महिला को नहीं होती मॉर्निंग सिकनेस की समस्या

अगर आप ये सोचती हैं कि हर महिला मॉर्निंग सिकनेस की स्थिति से गुज़रती हैं तो गलत है। कुछ महिलाओं की प्रेग्नेंसी बिलकुल सामान्य होती है। छोटी-मोटी तकलीफों के अलावा उन्हें ऐसा ख़ास कुछ नहीं होता है। लेकिन कुछ महिलाएं मॉर्निंग सिकनेस जैसी परेशानी का सामना करती हैं। इस वजह से उन्हें नौ महीनें बड़े कष्ट के साथ बिताना पड़ते हैं।

सामान्य जीवन जीने में समस्या पैदा करती है मॉर्निंग सिकनेस

जिन महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है वह सामान्य होकर जीवन नहीं जी पाती हैं। कई बार तो कुछ महिलाओं को पूरे नौ महीने ही मॉर्निंग सिकनेस की समस्या रहती है। लेकिन इस परिस्थिति से घबराने की ज़रूरत नहीं। इस बारे में आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। वह इस बारे में आपको उचित परामर्श ज़रूर देंगे।

प्रेग्नेंसी के तीसरे या चौथे सप्ताह से शुरू होती है मॉर्निंग सिकनेस

महिलाओं को प्रेग्नेंसी में मॉर्निंग सिकनेस की परेशानी थर्ड या फोर्थ वीक से शुरू होती है। जैसे हमने आपको बताया कि ये पूरे नौ महीने भी चल सकती है। लेकिन कुछ महिलाओं को तीन महीने होते-होते ये समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। बस प्रेग्नेंसी के समय कुछ चीज़ों का ध्यान रखना पड़ता है। इससे आप मॉर्निंग सिकनेस को भी आसानी से फेस कर पाती हैं।

नौशिया, चक्कर आना मॉर्निंग सिकनेस के आम लक्षण हैं

यदि प्रेग्नेंसी में किसी महिला को मॉर्निंग में नौशिया, उल्टी या घबराहट हो तो ये मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण हैं। नौशिया की स्थिति में कई बार महिला डर जाती है। उसे लगता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी हुई हो। लेकिन इसका उपचार भी संभव है। नौशिया या घबराहट होने पर शांति रखें और डॉक्टर से इसके उपचार के बारे में जानकारी लें।

दिमाग को शांत रखना है बहुत ज़रूरी

इस दौरान महिला को अपना दिमाग एकदम शांत रखना चाहिए। इससे घबराहट की स्थिति निर्मित नहीं होती है। यदि आप मानसिक रूप से मज़बूत होंगी तो आपकी आधी परेशानी वैसे ही दूर हो जायेगी। थोड़ी देर आराम करने से भी मॉर्निंग सिकनेस में बहुत सुधार होता है। इसके लिए आप ध्यान या मैडिटेशन का सहारा भी ले सकती हैं।

हेल्दी डाइट लेना भी है बहुत ज़रूरी

आपको पूरी प्रेग्नेंसी में हेल्दी डाइट ही लेना चाहिए। अगर आप पौष्टिक आहार लेंगी तो इससे भी मॉर्निंग सिकनेस की समस्या दूर हो जायेगी। आपकी हेल्दी डाइट में सभी ज़रूरी तत्वों का होना आवश्यक है। ब्रेकफास्ट से लेकर डिनर तक आपको केवल हेल्दी डाइट का सेवन ही करना चाहिए। इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर अच्छा असर होता है। हेल्दी डाइट से आपके शरीर के सारे क्रिया-कलाप सही चलते हैं। साथ ही नींद भी अच्छी आती है। तो आप भी मॉर्निंग सिकनेस होने पर सही समय पर किसी विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।

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