मातृत्व को सहेजें प्रीनेटल योगा के साथ | Prenatal yoga for would be mom

by | Oct 23, 2018 | Pregnancy & Parenting | 1 comment

नवसृजन से जुड़ी हर एक बात ख़ास होती है। नए जीवन को वृद्धि करते हुए देखना वाकई सुखद होता है। फिर चाहे वह नवंकुरण किसी बीज का हो या फिर एक नन्ही-सी जान का। क्या रच दिया उस ईश्वर ने! और यह भी सोचिये किस आशीर्वाद से परिपूर्ण किया है एक स्त्री को। सृजन की यह गाथा किसी महान ग्रन्थ से क्या कम है। आइये इसी क्रम में जानें प्रीनेटल योगा (Prenatal Yoga) को। इस प्रेगनेंसी योगा (Pregnancy Yoga) के क्या इफ़ेक्ट होते हैं चलिए जानते हैं।

क्या है ‘प्रीनेटल योगाʼ (Prenatal Yoga)?

मां और होने वाले बच्चे की सुरक्षा के लिए बहुयामी परिणामों से सजा हुआ प्रीनेटल योगा। जी हां, प्रीनेटल योगा को हम प्रेगनेंसी योगा (Pregnancy Yoga) का ही एक रूप मानते हैं। प्रीनेटल योगा का अर्थ हुआ (प्रसव-पूर्व)। इसका मतलब ऐसा व्यायाम या एक्सरसाइज़ जो प्रसव के शुरूआती दिनों में की जाती है। इस योगा के अंतर्गत स्ट्रेचिंग, ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ को प्राथमिकता दी जाती है। इस योगा से मांसपेशियों को मज़बूत बनाने और लचीलापन बढ़ाने का काम किया जाता है।

प्रीनेटल योगा में क्या शामिल किया जाता है?

ब्रीदिंग एक्सरसाइज़

प्रीनेटल योगा में नाक के द्वारा धीमी गति से सांस लेने और छोड़ने का उपक्रम किया जाता है। जिससे जन्म के समय महिला को सांस से संबंधित परेशानियों से दूर रखा जा सके।

शरीर की स्ट्रेचिंग

प्रीनेटल योगा से शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे गर्दन, बाजू आदि को मूवमेंट करवाया जाता है। जिससे इन भागों में दर्द की समस्या से भी निज़ात मिलती है।

आसन

प्रीनेटल योगा में शरीर की मज़बूती, लचीलेपन और संतुलन के लिए आसन करवाये जाते हैं। प्रेगनेंसी के समय अक्सर शरीर में बैठते, उठते और सोते समय भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में प्रीनेटल योगा (Prenatal Yoga) से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता है।

प्रेगनेंसी योगा (Pregnancy Yoga) के लाभ

प्रीनेटल योगा के माध्यम से मांसपेशियों का लचीलापन और मज़बूती बढ़ती है। प्रेगनेंसी के दौरान पेट बढ़ने से पीठ के नीचे वाले हिस्से में होने वाला दर्द कम होता है। उल्टी, सिर दर्द और सांस की तकलीफ भी प्रीनेटल योगा से कम होती है। इस योग के द्वारा अच्छी नींद भी पाई जा सकती है। तनाव को भी प्रीनेटल योग से ही कम किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी के नौ महीने तकलीफदेह होते हैं। शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि इन दिनों केवल और केवल आराम करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है। गर्भावस्था के समय भी महिला का एक्टिव होना ज़रूरी होता है। कुछ महिलाओं की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाते हैं। इसलिए उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही काम करना चाहिए।

प्रीनेटल योगा आसन

प्रेगनेंसी के पहले

आप अपने परिवार को बढ़ाना चाहती हैं तो पहले आपका सेहतमंद होना ज़रूरी है। आप फिट रहेंगी तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको ज़्यादा समस्याएं उठाना नहीं पड़ेगी। शरीर और मानसिक रूप से स्वस्थ होकर आप गर्भावस्था की जटिलताओं को दूर कर सकेंगी।

प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में

जैसे ही आपको पता चलता है कि एक नवअंकुरण आपके भीतर करवट ले रहा है। वैसे ही आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति और भी गंभीर हो जाना चाहिए। शुरुआत के तीन महीने में आप आराम से योग कर सकती हैं। इस समय तितली आसन को शुरू करना अच्छा रहता है। इससे पैरों की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं। घुटनों का लचीलापन बढ़ता है। प्रसव के समय इस आसन की सहायता से दर्द को भी कम किया जा सकता है।

• प्रेगनेंसी के सेकंड ट्राइमेस्टर में

धीरे-धीरे बच्चे का वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में महिला के लिए हर आसन कर पाना मुश्किल हो जाता है। इस समय कटि चक्रासन, सेतुबंध आसन, वज्रासन और पैरों के हल्के व्यायाम किये जा सकते हैं। महिला चाहे तो लेटकर तितली आसन और भ्रामरी प्राणायाम भी कर सकती है।

प्रेगनेंसी के थर्ड ट्राइमेस्टर में

डिलीवरी का समय नज़दीक आने पर अनुलोम-विलोम करना उचित रहता है। इस तरह से नॉर्मल डिलीवरी की स्थिति को पाना आसान हो जाता है।

इस तरह से प्रीनेटल योगा (Prenatal Yoga) गर्भावस्था के लिए सबसे बेहतर व्यायाम माना जा सकता है। लेकिन यदि किसी तरह की कोई समस्या है तो डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। इस प्रेगनेंसी योगा (Pregnancy Yoga) को किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही करें।

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