बच्चों को रिस्पॉन्सिबल बनाने के लिए उठाइये ये कदम

by | Aug 4, 2020 | Pregnancy & Parenting | 0 comments

प्रेग्नेंसी एंड पैरेंटिंग इंसान के जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे गुज़रते हुए एक अपरिपक्व संतान समझदारी के मुकाम हासिल करती है। देखिये पैरेंटिंग के कोई नियम नहीं होते हैं। हर पालक अपने तरीकों से अपनी संतान को पालते हैं। अब आप किसी के तरीके को सही कह सकते हैं और किसी को गलत। लेकिन कुछ क्वालिटीज़ ऐसी होती हैं जो हर व्यक्ति अपने बच्चे में देखना चाहता है। जैसे बच्चे को रिस्पॉन्सिबल बनाना। ज़रूरी नहीं कि आप बच्चों पर प्रेशर डालें। बिना प्रेशर डाले भी बच्चों को ज़िम्मेदार बनाया जा सकता है। हैंडल विथ केयर की स्थिति यहां पर लागू नहीं होती है। क्योंकि एक समय बच्चों के साथ थोड़ी कठोरता भी दिखाना पड़ता है। जीवन में कुछ रूल्स बनाना बहुत आवश्यक होता है। पर ये भी तो ज़रूरी है कि पहले हम खुद उसका पालन करें। साथ ही ये भी ज़रूरी है कि बच्चों को एप्रिशिएट किया जाये। इससे वह बेहतर कामों के लिए और ज़्यादा प्रयास करेंगे। तो आइये इस बारे में कुछ और बातों को आप तक पहुंचाया जाये।

रिस्पॉन्सिबल होते बच्चे बनते हैं समझदार

ये कहना गलत नहीं होगा की रिस्पॉन्सिबल बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में समझदार होते हैं। वो रिस्पॉन्सिबल होते हए समझदार बनते हैं या समझदार बनते हुए रिस्पॉन्सिबल बनकर समझदार होते हैं, ये समझने की बात है। रिस्पॉन्सिबल बच्चों में अपने आप सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होने लगती है। साथ ही वो ऐसे बच्चों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं जो थोड़े शैतान होते हैं। ज़िम्मेदारी का भाव उनमें आत्मभाव और आत्मसंतुलन को बढ़ाता है। वहीं जब आप बच्चों की मदद हर काम में करते हैं और उन्हें ज़िम्मेदार नहीं बनने देते हैं तो बच्चों की निर्भरता आप पर बढ़ जाती है। इससे उनका अकेले काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए बच्चों को रिस्पॉन्सिबल बनाना बहुत ज़रूरी है।

रिस्पॉन्सिबल बनाने का मतलब उग्रता नहीं है

जी हां आपने अक्सर देखा होगा कि कई पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ बहुत कठोर रवैया अपनाते हैं। उन्हें दवाब डालकर काम करवाए जाते हैं। ऐसे में वो रिस्पॉन्सिबल बनेंगे या नहीं कहना मुश्किल है। लेकिन हां ज़िद्दी ज़रूर बन जायेंगे। बच्चों को रिस्पॉन्सिबल बनाने के लिए उन्हें प्यार और विश्वास से जीतें। उन्हें समझाएं कि अपने हाथ से काम करने पर वह और ज़्यादा कुशल बनेंगे। जब बच्चे खुद काम करने लग जाएं तो उन्हें नियंत्रण करना भी सिखाएं। वर्ना पता चला कि रिस्पॉन्सिबल बनने के चक्कर में वह ओवर कॉन्फिडेंट हो चुके हैं। फिर आपका नियंत्रण भी उन पर नहीं रह पायेगा और फिर वो अपनी मनमानी करेंगे। जब आपका उन पर ठीक से नियंत्रण होगा तो आपको किसी तरह की टेंशन नहीं रहेगी और बच्चे भी इंडिपेंडेंट होंगे।

एप्रीसिएशन से बच्चे जल्दी सीखते हैं

देखिये एप्रीसिएशन भला किसे पसंद नहीं होता है। जब आपको एप्रीसिएशन मिलता है तो आप भी तो और अच्छा करने के लिए प्रेरित होते हैं। प्रशंसा आपके लिए एक मैजिक डोज़ का काम करती है। इसे लेते ही आपमें एक बदलाव देखने को मिलता है। उसी तरह बच्चों के द्वारा किये हर काम पर उसे एप्रीसिएशन देना चाहिए। इससे उसे लगता है कि वह और भी अच्छी तरह काम कर सकता है। बच्चा अपने प्रयत्न बढ़ाता है और इस तरह वह रिस्पॉन्सिबल बनता है। रिस्पॉन्सिबल बनते ही उसमें जबरदस्त बदलाव देखने को मिलते हैं। इसका लाभ उन्हें बड़े होने के बाद वास्तविक रूप से मिलता है। जबकि जो बच्चे रिस्पॉन्सिबल नहीं बन पाते वो सिर्फ अपने जीवन के हर काम के लिए मदद की तलाश करते हैं। तो ये निर्णय तो सिर्फ आपको लेना है कि बच्चों को रिस्पॉन्सिबल बनाना चाहिए कि नहीं।

प्रेशर डालकर काम न करवाएं

इस बारे में हम आपको पहले भी कह चुके हैं। जी हां प्रेशर डालकर बच्चों से काम करवाना बिलकुल सही नहीं होता है। बिना प्रेशर डाले आप बच्चों के साथ प्यार से बात करें। अगर बच्चा किसी काम से मना भी करता है तो उसे बैठाकर अच्छे से बात समझायें। इससे बच्चा बात अपने दिमाग में रखता है और अच्छे-बुरे का विचार करता है। लेकिन आप दवाब डालकर काम करवाएंगे तो बच्चा कभी आपको नहीं सुनेगा। बल्कि वह और भी ज़िद्दी हो जायेगा। इस बात को समझें और प्यार के साथ बच्चे को ट्रीट करें।

तो आप भी अपने बच्चों को रिस्पॉन्सिबल बना सकते हैं कुछ आसान तरीकों से।

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