महिलाओं में होने वाले एनीमिया के लक्षणों को जानें और समझें

by | Jan 10, 2020 | Self Care | 0 comments

भारत में एनीमिया बड़े पैमाने पर अपनी जड़ें मज़बूत किये हुए है। खासकर यहां की महिलाएं इस विषय में अधिक संवेदनशील हैं और इसी कारण एनीमिया की गिरफ्त में हैं। ये प्रश्न बार-बार दिमाग में आता है और इसका आना स्वाभाविक भी है कि ऐसा क्यों है? जबकि हम सब जानते हैं कि महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान हमे पुरुषों से ज़्यादा रखना है। इसलिए नहीं क्योंकि इसका कारण लिंग भेद है, लेकिन इसलिए क्योंकि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक नाज़ुक होती हैं और साथ ही जीवन के दायित्व जिसमें नई ज़िंदगी का सृजन भी शामिल है उन्हें वहन करना होता है। परिवार की महिला उस घर की धूरी होती है, शक्ति होती है। इसलिए ये कहना कि वह कमज़ोर हैं, गलत बात है। एनीमिया सिम्पटम्स को पहचानकर आप इसका उपचार करवा सकते हैं। लेकिन ये जानना भी ज़रूरी है कि आयरन डेफिशियेंसी क्यों हो रही है? इस बारे में और अधिक जानकारी दे रहे हैं डॉक्टर संदीप बरटक्के, जो आदित्य बिड़ला मेमोरियल हॉस्पिटल में एक हीमटोलजिस्ट हैं।

क्या होता है एनीमिया?

आपको बता दें कि एनीमिया वह स्थिति है जिससे मानव शरीर में लाल रक्त कणों की संख्या अपर्याप्त हो जाती है और हीमोग्लोबिन का स्तर भी नीचे गिर जाता है, जिससे रक्त के द्वारा ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता का भी हास होता है। एनएफएचएस (NFHS) के द्वारा तैयार किये एक डाटा में ये बात सामने आई कि 2016 में 50.4% गर्भवती महिलाएं, 53.2% महिलाएं जो गर्भवती नहीं थीं और 58.6% बच्चे एनीमिक पाए गये। ये आंकड़े चौकाने वाले हैं। इनमें आयरन डेफिशियेंसी होने के अनेक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। अब जबकि हमारा देश तेज़ी से विकास की राह में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, ऐसे में इस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देश की प्रगति में बाधक हो सकती हैं।

एनीमिया के प्रकार

अधिकतर लोगों को केवल ये जानकारी है कि एनीमिया से शरीर में रक्त की अल्पता संभावित होती है। लेकिन आपको बता दें कि एनीमिया के भी दो प्रकार होते हैं। इसमें सबसे सामान्य प्रकार जो कि बड़े पैमाने पर पाया जाता है वो आयरन डेफिशियेंसी से होने वाला एनीमिया है। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे इससे प्रभावित होते हैं। एनीमिया का यह प्रकार मुख्य रूप से महिलाओं में पाया जाता है। 12 साल की लड़की से लेकर 49 साल की महिलाओं तक माहवारी में रक्त की क्षति परिवर्तनशील होती है। इसका अर्थ है कि उम्र बढ़ने के साथ पीरियड्स में जाने वाला रक्त मात्रा में घट या बढ़ सकता है।

यह महिला की आयु, शरीर संरचना, शारीरिक परिवर्तनों और विकास की गति पर निर्भर करता है। प्रत्येक माहवारी में रक्त की ये मात्रा 10 से 250 मिलीलीटर तक अनुमानित होती है, जिसमें 4-100 मिलीग्राम मात्रा आयरन की होती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान भी महिला के शरीर से तकरीबन 500 मिलीग्राम आयरन का हास होता है, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में आयरन की ये कमी आयरन अवशोषण को दुगुना कर देती है, जिसके कारण एनीमिया की संभावना बढ़ जाती है।

एनीमिया के होने का दूसरा बड़ा कारण विटामिन बी12 की अल्पता है, जो मुख्य रूप से शाकाहारियों या पूर्णत: शाकाहारियों (Vegans) में देखने को मिलती है। आजकल लोगों में बड़ी संख्या में विटामिन बी 12 डेफिशियेंसी होती है। वैसे इसके अनेक कारण हो सकते हैं। लेकिन इस अवस्था के प्रति सचेत हो जाना ही बेहतर है।

ज़रूरी है एनीमिया सिम्पटम्स को समझना

यदि आप सही समय पर एनीमिया सिम्पटम्स को समझ लेते हैं तो एक बड़ी क्षति से बच सकते हैं। लेकिन विडम्बना ये है कि हमारे देश में महिलाएं अक्सर इन लक्षणों को नजरअंदाज़ कर देती हैं। आइये एनीमिया सिम्पटम्स के बारे में आपको विस्तार से बताया जाये। इस दौरान ग्रसित व्यक्ति अत्यधिक थकान का अनुभव करता है। साथ ही उसकी त्वचा पीत वर्ण मतलब पीली हो जाती है। सीने में दर्द होता है, उनींदापन बना रहता है, ज़बान पर छाले हो जाते हैं, भूख में कमी जैसे लक्षण एनीमिक रोगी में सामान्य रूप से परिलक्षित होते हैं। यदि आप शरीर में हुई आयरन की इस कमी को दूर करना चाहते हैं तो इसे संतुलित आहार जिसमें आयरन और विटामिन सी युक्त भोजन शामिल हैं, उसका सेवन करना चाहिए।

विटामिन सी युक्त आहार को बढ़ाने से आयरन के अवशोषण में सहायता मिलती है। खाद्य पदार्थों के अतिरिक्त ऐसे पेय पदार्थों से भी दूर रहें जो आयरन का अवशोषण होने से रोकते हैं। ये आपके लिए एक बड़ा खतरा बन सकते हैं। एनीमिया सिम्पटम्स दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।

संभव है एनीमिया का उपचार

एनीमिया के उपचार के अंतर्गत सबसे पहले गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी और इसके संभावित कारणों की जांच की जाती है। रोगी में आयरन डेफिशियेंसी के कारण हुई हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने के लिए ओरल आयरन सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं। जो मरीज़ ओरल सप्लीमेंट्स को सहन नहीं कर पाते हैं उन्हें ये सप्लीमेंट्स इंजेक्शन के द्वारा सलाइन चढ़ाकर दिए जाते हैं। ये आवश्यक है कि इन सप्लीमेंट्स का कोर्स तीन से छः महीने तक, जब तक तक की हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य न हो जाए करना चाहिए। इस तरह से आयरन का शरीर में पूर्ण भंडारण होने लगता है। धीरे-धीरे रोगी सामान्य अवस्था में आने लगता है। इसके बाद भोजन में प्रयुक्त सही पोषक तत्वों के द्वारा इस स्थिति को यथावत रखा जा सकता है।

ये भोज्य पदार्थ आयरन डेफिशियेंसी को दूर रखेंगे

अब मन में ये प्रश्न उठना भी स्वाभाविक है कि ऐसे कौन-से पदार्थ खाए जाएं जो हीमोग्लोबिन की कमी को हमेशा हमसे दूर रखे। साथ ही ऐसी कौन-सी चीज़ें न खाएं जो एनीमिया के ख़तरे को बढ़ा दे। आयरन डेफिशियेंसी को दूर करने के लिए आप कुछ ऐसे पदार्थों को शामिल करें जिन्हें आप नियमित कर सकें।

इन चीज़ों को अपने आहार में शामिल करें –

• हरी पत्तेदार सब्जियां
• आयरन युक्त अनाज और ब्रेड
• ड्राई फ्रूट्स जैसे किशमिश और खुबानी
• कीवी, ऑरेंज, स्ट्रॉबेरी जैसे फल
• ऐसे पदार्थ जिसमें विटामिन बी 12 उपस्थित हो

इन चीज़ों से दूरी बनाकर रखें –

• कॉफ़ी, चाय
• दूध और डेरी उत्पाद
• साबुत अनाज और ब्राउन राइस
• अंगूर और मकई
• पास्ता (ग्लूटेन युक्त पदार्थ)
• मूंगफली और चॉकलेट

इन चीज़ों से आप जितना अधिक दूर रहेंगे आपके लिए अच्छा होगा। एनीमिया पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

एनीमिया से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए हमारे हेल्थ A-Z और सेल्फ केयर सेक्शन को ज़रूर देखें। इसी तरह की अन्य जानकारी के लिए वामा टुडे के हेल्थ सेक्शन को ज़रूर विज़िट करें।