अल्कोहल इस तरह नुकसान पहुंचा सकती है आपके शरीर को

by | Jun 22, 2020 | Self Care | 0 comments

अल्कोहल इंटोक्सिकेशन की स्थिति एक व्यक्ति को पूरी तरह बर्बाद कर देती है। इसके कारण न केवल व्यक्ति बल्कि उससे जुड़े लोगों को भी नुकसान होता है। वैसे भी शराब का नशा आपकी मनोदशा को कुंद कर देता है। इससे पेप्टिक अल्सर से लेकर लिवर डिज़ीज़ तक आपको अपना शिकार बना सकती है। यही नहीं शराब का अत्यधिक सेवन आपकी इम्युनिटी को भी प्रभावित कर सकता है। आइये आपको इस बारे में और जानकारी दें।

इस तरह गुलाम बनता है इंसान अल्कोहल का

जब आप अल्कोहल की पहली सिप लेते हैं तो मात्र 30 सेकेंड्स के भीतर अल्कोहल आपके दिमाग तक पहुंच जाता है। यह उन सभी रसायनों और कार्यप्रणालियों को धीमा कर देता है जिनका उपयोग दिमाग की कोशिकाएं सन्देश भेजने के लिए करती हैं। इसकी वजह से आपके मूड में परिवर्तन आ जाता है, आपकी रिफल्क्सेस (अनैच्छिक क्रियाएं) धीमी पड़ जाती हैं और संतुलन गड़बड़ा जाता है। आपकी सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और याददश्त कमज़ोर हो जाती है।

दिमाग पर अल्कोहल का होता है गहरा असर

लम्बे समय तक लगातार शराब पीते रहने से दिमाग सिकुड़ सकता है। इससे शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने की प्रक्रिया पर भी बुरा असर पड़ता है। यह नींद की स्थिति पर भी बुरा असर डालता है। आपका शरीर रात भर अल्कोहल को प्रोसेस करता रहता है। इस वजह से नींद बार-बार उचटती है और कई बार आपको बाथरूम जाने के लिए भी उठना पड़ सकता है। इसके अलावा शराब के नशे में आपसे कुछ अनैतिक काम भी हो सकते हैं।

एसिड बढ़ने से हो सकती है पेप्टिक अल्सर की समस्या

अल्कोहल से पेट की अंदरूनी दीवार पर इरिटेशन बढ़ जाता है और पाचक जूस तेजी से उत्पन्न होने लगता है। अल्कोहल और पाचक रस के मिल जाने से नॉशिया जैसी अनुभूति होती है और उलटी हो सकती है। लम्बे समय में पेट में अल्सर हो जाते हैं। पेप्टिक अल्सर के होने से व्यक्ति को अनेक समस्याएं हो सकती हैं। छोटी आंत और कोलोन यानी मलाशय पर बुरा असर पड़ने लगता है। इनमें से भोजन के गुज़रने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे डायरिया और सीने में जलन या एसिडिटी जैसी तकलीफें होने लगती हैं। कई बार ये पेप्टिक अल्सर कैंसर जैसी बीमारी बदल जाता है।

किडनी पर असर

दिमाग उस हार्मोन को असंतुलित करने लगता है जो किडनियों को बहुत अधिक मात्रा में पेशाब बनाने से रोकता है। ऐसे में बार-बार बाथरूम जाने की जरूरत महसूस होती है। इससे डिहाइड्रेशन तो होता ही है, लम्बे समय में किडनियों की सेहत भी बिगड़ जाती है।

लिवर डिज़ीज़ की संभावनाएं बनती हैं

अल्कोहल को तोड़ने और आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में लिवर को कई सारे टॉक्सिन्स यानी जहरीले तत्वों को झेलना पड़ता है। समय के साथ अल्कोहल लिवर को फैटी (फूला हुआ बना देता है) और इसके आस-पास मोटे, फाइबर से भरे ऊतकों का जमाव हो जाता है। इससे खून के बहाव में दिक्कत होने लगती है। कहा भी जाता शराब आपके लिवर को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती है। कोशिकाएं पोषण के अभाव में खत्म होने लगती हैं, लिवर पर खरोचें पड़ने लगती हैं और सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी पनप जाती है। ये लिवर डिज़ीज़ आपको लिवर ट्रांसप्लांट तक लाकर खड़ा कर देती है। लिवर डिज़ीज़ बचने के लिए शराब छोड़ दें।

डायबिटीज़ का आना

पैंक्रियाज यानी अग्नाशय का काम होता है इन्सुलिन तथा अन्य रसायनों का निर्माण। अल्कोहल इसमें बाधा खड़ी करने लगता है। इस अंग में सूजन आ जाती है और क्षति होने लगती है। मतलब शरीर पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन नहीं बना पाता और डायबिटीज़ की स्थिति आ जाती है। यह स्थिति आगे जाकर पैंक्रियाटिक कैंसर में भी तब्दील हो सकती है।

कमज़ोरी और नॉशिया

अल्कोहल शरीर में पानी की कमी कर देता है और शरीर तथा दिमाग की खून की नसों को चौड़ा कर देता है। इसके कारण सिरदर्द होने लगता है। आपका पेट अल्कोहल से मिले टॉक्सिन्स से निजात पाना चाहता है और आपको नॉशिया और उलटी की शिकायत होने लगती है। खून में शकर की कमी होने लगती है जिसकी वजह से कमज़ोरी और कंपकंपी आने लगती है।

हृदय की धड़कनों का असंतुलन

केवल एक रात के अल्कोहल का अधिक सेवन दिल की धड़कनों को सामान्य रखने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नलों को असामान्य बना देता है। सोचिये रोज़ाना अल्कोहल के सेवन से यह परिवर्तन स्थाई होने लगता है। लम्बे समय में यह दिल की मांसपेशियों को ढीला और फैला हुआ बना देता है। इससे खून ठीक से पम्प नहीं हो पाता।

अन्य प्रभाव

अल्कोहल का नियमित सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर करता है, हॉर्मोन्स में असंतुलन पैदा करने लगता है, श्रवण क्षमता को कमज़ोर बनाने लगता है और हड्डियों तथा मांसपेशियों को भी कमज़ोर कर देता है।

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