हमारे रिलेशनशिप को मज़बूत बनाते हमारे त्यौहार

by | Oct 24, 2019 | Love & Relationship | 0 comments

लव एंड रिलेशनशिप में हमारे त्यौहारों का विशेष महत्व है। हमारे जीवन में खुशहाली लाने और रिश्तों को मजबूत बनाने में हमारे रंग-बिरंगे त्यौहार एक अहम भूमिका निभाते हैं। त्यौहार जीवन में नयी उमंग और उत्साह की नयी लहरों को जन्म देते हैं। अगर हम इंडियन कल्चर की बात करें तो हमारे जन-जीवन में उत्सवों का पुराने समय से ही बहुत महत्व रहा है। आइये जानते हैं कि किस तरह से ये त्यौहार फैमिली वैल्यूज़ में एक संजीवनी की तरह अपनी सार्थक उपस्थिति बनायें रखते हैं।

रिलेशनशिप को खूबसूरत बनाते हैं ये त्यौहार

त्यौहार कोई भी हो, वह हमे अपनी रूटीन लाइफ से अलग बहुत ही आनंददायक पलों के साक्षी बनाते हैं। अपने रिश्तों में ताज़गी लाने और मिठास बढ़ाने में ये त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण किरदार अदा करते हैं।

आजकल समय का अभाव एक बहुत ही बड़ी समस्या है। जो कईं बार रिलेशनशिप में दूरियां भी ले आता है। ऐसे में ये त्यौहार बीच में आई हुई दूरियों को दूर करके एक साथ हंसने, मुस्कुराने का मौका देते हैं। सही मायनों में देखा जाये तो हमारे जीवन में सुखद परिवर्तन लाते हैं। त्यौहार या पर्व सामाजिक मान्यताओं, परम्पराओं और पूर्व संस्कारों पर आधारित होते हैं। जिस तरह से हर धर्म, समुदाय की अपनी मान्यताएं होती हैं, उसी तरह से त्यौहार मनाने की विधियों में भी अंतर होता है। हमारे सभी त्यौहार रिलेशनशिप को मज़बूती देते हैं।

सबको मज़बूत रिलेशनशिप में जोड़ते त्यौहार

हम सभी समाज में रहते हैं और इस समाज में रहते हुए हर तरह के व्यक्तियों के साथ हमारा सामना होता है। अब ज़रा सोचिये कि कभी किसी बात पर आपके पड़ोसी के साथ आपकी अनबन हो गयी, तो क्या रिश्ता ख़त्म? बिलकुल नहीं, अब कल को कभी आपके या आपके पड़ोसी के परिवार में किसी तरह की कोई समस्या आएगी तो क्या आप मदद नहीं करेंगे? या क्या आपके पड़ोसी आपकी मदद नहीं करेंगे, ज़रूर करेंगे। ये रिलेशनशिप होते ही ऐसे हैं।

कभी किसी बात पर नाराज़ हो जाना फिर किसी का प्यार से मनाना तो आम बात है। इसी तरह के ताने-बाने में बंधे रहते हैं हमारे-आपके रिलेशनशिप। अब जब तक किसी त्यौहार पर आपके पड़ोसी के घर से कोई मिठाई या पकवान बनकर नहीं आता है तब तक त्यौहार का मज़ा ही कहां आता है। त्यौहार की तैयारियों के बीच हंसी-मजाक, रूठना-मनाना सब कुछ तो चलता ही रहता है।

फैमिली वैल्यूज़ को साथ जोड़ते त्यौहार

नई और पुरानी पीढ़ियों के बीच अक्सर विरोधाभास होता है, कारण बहुत-से हैं। पर ये दो विपरीत बिन्दु कभी किसी मसले पर एक नहीं हो पाते हैं। लेकिन ये त्यौहार एक ऐसा माध्यम है, जो इन दोनों विपरीत ध्रुवों को मिलाने का प्रयास करते हैं। इन त्यौहारों में सभी एक साथ इस तरह से घुल-मिल जाते हैं कि फिर जनरेशन हमारी पहचान नहीं होती, पहचान होती हैं केवल हमारी भावनाएं। ये त्यौहार ही हमारी फैमिली वैल्यूज़ को बनाये रखते हैं। यही तो समय है जब हम कुछ पुराना सीखें और बड़ों को कुछ नया सिखाएं। त्यौहारों पर एक साथ मिलकर काम करना, बातों के माध्यम से यादों की सुनहरी शाम को फिर से ताज़ा करना, यही सब तो हमे पास लेकर आता है। देखा जाये तो त्यौहार ही फैमिली वैल्यूज़ को जीवित रखते हैं।

इंडियन कल्चर को नए रूप में ढालते हमारे त्यौहार

मानव जीवन अनेक तरह की विविधताओं से सजा हुआ है। संसार चक्र में घूमते हुए हमें बहुत तरह के कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। वैसे तो अपने पूरे जीवन में हम कुछ न कुछ सीखते ही हैं, पर हर बार इन त्यौहारों के माध्यम से बहुत गहन और गंभीर सीख के साथ हम जुड़ते जाते हैं। रिलेशनशिप में हरदम ताज़गी कैसे बनी रहे? अपनों के बीच आई दूरियां कैसे दूर हों? यही सब तो सिखाते हैं ये त्यौहार। इंडियन कल्चर की एक बानगी हैं हमारे त्यौहार। आपने अक्सर देखा होगा कि परिवार के बड़े लोग किस तरह से त्यौहारों पर घर की जरूरतों को ध्यान में रखकर सभी आवश्यकताओं की पूर्ती करते हैं। ये सब बातें ही तो सीखने की होती हैं, जो आगे जाकर हमारे बहुत काम आती हैं। इसी तरह से फैमिली वैल्यूज़ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होती हैं।

त्यौहारों में विविधता

हमारे यहां ऐसे बहुत से त्यौहार हैं जो हमारे रिश्तों को मज़बूत बनाने के साथ एक समर्पण का भाव पैदा करते हैं। तभी तो पूरी दुनिया इंडियन कल्चर की मुरीद बनी हुई है। सभी त्यौहारों की अपनी परंपरा होती है, जिससे संबंधित जन समुदाय इसमें एक साथ भाग लेता है। त्यौहारों की इस विविधता में ही तो छिपा हुआ है एकता का भाव। यही इंडियन कल्चर की सबसे बड़ी पहचान है। एकता की यही भावना रिश्तों को मज़बूती के साथ संभाले रखती है।

पर्व और उत्सव हमारी आत्मा से जुड़े हुए होते हैं, यही कारण है कि यह त्यौहार सिर्फ खुशियां बांटते हैं। त्यौहार भले ही किसी भी धर्म समुदाय से जुड़ा हुआ हो, उत्साह और मौज की वही उमंग होती है, वही अंतहीन खुशियां होती हैं जो सबको बांधे रखती हैं।

अब अगर हम बात करें अपनी भावी पीढ़ी की तो सबसे ज़्यादा ज़रुरी होता है उन्हें अपने साथ जोड़ना, उन्हें अपने संस्कारों और परंपराओं से रूबरू करवाना, तो त्यौहारों से बढ़कर और दूसरा माध्यम भला और क्या हो सकता है? नाचते-गाते, उछलते-कूदते ये नन्हे शैतान त्यौहारों पर बड़ों से बढ़कर उत्साह दिखाते हैं। इसी बहाने ये बच्चे अपनी जड़ों से एक अपनत्व के रिश्ते के साथ जुड़ते जाते हैं।

तो इन त्यौहारों पर अपनों से जुड़िये और सबको एक प्रेम की डोरी से बांधते हुए त्यौहार की खुशियों में खो जाईये, और हां अगर किसी से लंबे समय से बातचीत बंद है तो इंतजार क्यों? जल्दी से जाकर बजाइए उनके घर की बेल और फैलने दीजिये स्नेह की सुगंधित महक को।

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