साधारण स्किन प्रॉब्लम्स समझकर इग्नोर न करें सोरायसिस को

by | Aug 17, 2019 | Homeopathy, Skin Disease | 0 comments

स्किन डिज़ीज़ आजकल एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही हैं। इसके कारण तो बहुत-से हो सकते हैं, लेकिन फिर भी समस्या है तो गंभीर। अब कारणों में उलझने से बेहतर है इनके समाधान के बारे में सोचा जाये। अब आप सोरायसिस के बारे में ही देख लीजिये। आज लाखों लोग इस समस्या से परेशान हैं। इस तरह की स्किन प्रॉब्लम्स किसी को भी अपना शिकार बना सकती हैं। सोरायसिस कॉज़ेज़ के कोई निश्चित आधार नहीं हैं। लक्षणों के आधार पर सोरायसिस टाइप्स को पहचाना जा सकता है। होम्योपैथी मेडिसिन में इसके अनेक सफल उपचार हैं। इससे अनेक स्किन प्रॉब्लम्स को दूर किया जा सकता है। आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है सोरायसिसॽ

सोरायसिस चमड़ी की एक ऐसी बीमारी है जिसमें चमड़ी के ऊपर मोटी परत जम जाती है। यह स्किन प्रॉब्लम्स में सबसे खतरनाक मानी जाती है।

दरअसल चमड़ी की सतही परत का अधिक बनना ही सोरायसिस है। त्वचा पर सोरायसिस की बीमारी सामान्यतः त्वचा की लाल रंग की सतह के रूप में उभरकर आती है। सोरायसिस को आम भाषा में अपरस कहते हैं। लोग इस बीमारी को संक्रमित मानते हैं परन्तु ये छुआ-छूत के कारण नहीं फैलती है। सोरायसिस किसी को भी हो सकता है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष और किसी भी उम्र में हो सकता है।

फैलने से कैसे रोकें सोरायसिस कोॽ

• सोरायसिस के रोगी को मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए।
• धूल मिट्टी से बचें, अगर कोई काम करें तो हाथ-पैर, बदन पूरा कपड़ों से ढका हो।
• हमेशा सूती वस्त्र पहनें, नायलॉन कपड़े के बने वस्त्र न पहनें जिससे खुजली हो।
• नमक का सेवन बंद करें।
• भारी काम करने के बाद तुरंत ठण्डे पानी से स्नान न करें।

जानिए सोरायसिस कॉज़ेज़ को

यह स्किन प्रॉब्लम्स अन्य जैसी संक्रामक नहीं है। यह जिनेटिक एवं इम्यून सिस्टम से संबंधित है ना कि संक्रमण से। जी हां सोरायसिस कॉज़ेज़ वंशानुगत होती है। परन्तु खान-पान, रहन-सहन, वातावरण, प्रदूषण, रक्त विकार, वात व्याधि भी सोरायसिस कॉज़ेज़ हो सकते हैं।

रोगी की त्वचा की ऊपरी सतह निकल जाती है और लाल-लाल चकत्ते दिखने लगते हैं। या फिर त्वचा पर मोटी परत जम जाती है जिसमें खुजली होती है। त्वचा में तांबे के रंग के निशान बन जाते हैं, और ये निशान पूरे शरीर में हो जाते हैं।

सोरायसिस शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है। देखा जाये तो सोरायसिस कॉज़ेज़ बहुत सामान्य हैं। लेकिन इसका प्रभाव बहुत खतरनाक होता है।

होम्योपैथिक में संभव है ऐसी स्किन प्रॉब्लम्स का उपचार

सल्फर : सोरायसिस के रोगी के लिए इस औषधि का उपचार शुरुआत से ही करें। रोगी को आराम होने पर शक्ति को बढ़ा देना चाहिए। इस गोली को रोगी को हफ्ते में एक बार देना चाहिए। त्वचा पर चेचक से दाने उठने और नाखूनों के किनारों पर दरार पड़ने की अवस्था में ये औषधि लाभप्रद है।

आर्सेनिक एल्बम 200 पी : यह औषधि सोरायसिस में अत्यंत प्रभावकारी होती है। इसका प्रयोग विशेष कर तब होता है जब सिर और माथे में जैसी सूखी परत जम जाए।

एलुमिना : शरीर की त्वचा खुरदरी और सूखी हो, अधिक खुजली उठे और खुजलाने से रक्तस्त्राव होने लगे; ऐसी स्थिति में इस औषधि का सेवन करने से राहत मिलती है।

सोराइनम : सोराइनम की तासीर ठंडी होती है। इस औषधि का चिकित्सा क्षेत्र उन लोगों में है जिन्हें खाज-खुजली की समस्या होती है।

आर्सेनिक आयोडेटम : यह औषधि सोरायसिस के लिए एक कारगर उपचार है।

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