महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े आयुर्वेदिक उपचार

by | Dec 17, 2019 | Ayurveda, Therapy | 0 comments

थेरेपी में ऐसे बहुत सारे प्रकार हैं जो आपके स्वास्थ्य पर अच्छा असर डालते हैं। आयुर्वेदा अर्थवेद का उपवेद है एवं संसार की पुरातन उपचार पद्धतियों में से एक है। इसे पुरातन भारतीय आयुर्वेदिक उपचार पद्धति के नाम से जाना जाता है। ग्रंथो में इस बात का वर्णन मिलता है कि वनस्पतियों की उत्पत्ति मनुष्य जाति के जन्म से पहले ही हो चुकी थी। तत्पश्चात उत्थान के साथ मनुष्य जाति द्वारा इन वनस्पतियों को रोगों को ख़त्म करने के लिए प्रयोग किया जाने लगा। इन औषधियों में घृतकुमारी और अशोक जैसी वनस्पति भी उपलब्ध है। इसके अलावा अजवाइन का प्रयोग भी महिलाओं के लिए अच्छा माना जाता है। स्त्री व्याधियों में ये सभी औषधियां बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं।

सदियों से आयुर्वेदिक उपचार में कामगार हैं ये औषधियां

जी हां इन औषधियों का प्रयोग लंबे समय से आयुर्वेदिक उपचार में होता आया है। आपको शायद ये पता भी होगा कि पहले केवल इन्ही उपचार पद्धतियों का प्रयोग होता था। आयुर्वेदिक उपचार पद्धति बहुत सफल भी मानी जाती है।

महिला रोगों में सरलता से होता है आयुर्वेदिक उपचार पद्धति का प्रयोग

जी हां महिला संबंधी सभी रोगों में आयुर्वेदिक उपचार पद्धति का प्रयोग होता आया है। महिलाओं के समस्या रोग आयुर्वेदिक उपचार द्वारा ठीक भी किये जा सकते हैं। लेकिन ये तभी संभव है जब आप किसी कुशल विशेषज्ञ से इसके बारे में सलाह लें।

गर्भाशय की कमियों को दूर करती है अशोक वनस्पति

अशोक अपने नाम के मुताबिक महिलाओं को तमाम व्याधियों से राहत दिलाकर उन्हे कष्ट रहित करता है। अशोक का प्रयोग प्राचीन काल से भारतीय करते आ रहे हैं। वर्तमान वैज्ञानिक शोधों से ये साबित हो चुका है कि अशोक औरतों के गर्भाशय में मौजूद कमियों का निदान करने में पूणर्तया सक्षम है। इसके छाल, बीज एवं फूलों का दवा की तरह प्रयोग किया जाता है।

अजवाइन प्रसूताओं के लिए बहुत गुणकारी है

पुरातनकाल से अजवाइन का प्रयोग घरेलू दवा की तरह होता आ रहा है। अधिकतर सारे भारत में इसकी पैदावार होती है। इसका स्वाद, तीक्ष्ण और कडुआ होता है। इसके बीज, पत्ते, अर्क सभी भाग काम में आते हैं। अजवाइन स्त्री रोगों में विशेषकर उपयोगी होती है। यह प्रसूताओं के लिए तो लाभकारी है। साथ ही महावारी की अनियमितताओं, बांझपन और रक्त प्रदर में भी इसके सेवन से लाभ होता है। अजवाइन से गर्भाशय शुद्ध होता है। इसके अलावा उदर की गैस का शमन भी होता है और भूख खुलती है। गर्भकाल के बाद आने वाली कमज़ोरी खत्म होती है तथा काया निरोगी और मज़बूत बनती है।

एक उपयोगी औषधि है गूलर

गूलर फायदेमंद औषधीय जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है। अर्थवेद में भी इसके पौष्टिक गुणों की तारीफ की गई है। इसकी गिनती दूध वाले पेड़ो में होती है। इसके बारे में एक किवदंती है कि इसके पुष्प को गुप्तफुल कहा जाता है। क्योंकि गूलर के पुष्प दिखाई नहीं पड़ते हैं या गुप्त रूप में रहते हैं। गूलर महिला व्याधियों की बेहतरीन दवा है। रक्तस्त्राव, श्वेत प्रदर, मासिक धर्म में अधिक रक्त आना, गर्भपात इत्यादि में फायदेमंद है। गुलेर के तीन-चार पके फल एक-एक करके दिन में तीन-चार बार प्रयोग करने से महिला को प्रदर व्याधि में आराम होता है। इसलिए इसका सेवन ज़रूर करें।

घृतकुमारी महिला और पुरुषों के लिए सामान रूप से लाभकारी है

घृतकुमारी को घीकुमारी भी कहते हैं। यह भारत में सभी जगह पाया जाता है। घृतकुमारी का मुख्य भाग औषधीय गुणों से भरा होता है। घृतकुमारी की सुखाकर एक पदार्थ बनाया जाता है जिसे एलुआ कहते हैं। इसी को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। आपको बता दें कि घृतकुमारी महिला और पुरुषों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण औषधि है। घृतकुमारी महिलाओं के मासिक में होने वाली अनियमितताओं को समाप्त करती है। साथ ही ये गर्भाशय के विकारों को भी दूर करती है।

आप भी इन आयुर्वेदिक उपचार को अपनाकर महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

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