रोगों से मुक्ति पाने के लिए अपनाइये गुग्गल के ये नुस्खें

by | Jun 11, 2020 | Ayurveda, Therapy | 0 comments

आयुर्वेदा में ऐसे अनेक पदार्थों की व्याख्या की गई है जो देखने में तो सामान्य हैं पर उनके प्रभाव चमत्कारिक हैं। जैसे यदि बात की जाये गुग्गल की। गुग्गल एक राल जैसे पदार्थ को कहा जाता है। यह गुग्गल पेड़ से प्राप्त होता है। यह बहुत अधिक गर्मी के दौरान पौधे द्वारा उत्सर्जित एक गोंद राल होती है। यह कई रोगों को दूर करने में मदद करता है। राल प्राप्त करने के लिए, मुख्य तने में गोलाई में कट लगाया जाता है। इन कट्स के माध्यम से, सुगंधित तरल पदार्थ एक सुनहरे भूरे रंग या लाल भूरे रंग में तेज़ी से ठोस हो जाता है। सूखे राल में कड़वा सुगन्धित स्वाद और गंध होती है। यह प्राप्त राल ही गुग्गल होती है जो आयुर्वेदिक मेडिसिन के उद्देश्य के लिए प्रयोग की जाती है।

क्या होता है गुग्गल?

गोक्षुरादि गुग्गल (Gokshuradi Guggulu) एक फूल वाला पौधा है जो उत्तरी अफ्रीका, मध्य एशिया और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है। इस पौधे की पत्तियां ट्राइफोलिएट होती हैं और झाड़ी की शाखाएं कांटेदार होती हैं। यह जननांग प्रणाली और मूत्र पथ को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह आयुर्वेदिक मेडिसिन शरीर से विषाक्त पदार्थों को खत्म करती है और गुर्दे को दोबारा जीवित करती है।

गुग्गल एक ऐसी औषधि है जो राजस्थान में अधिक मात्रा में पाई जाती है। वैसे यह पूरे भारत में पाई जाती है। आबू पर्वत पर पैदा होने वाला गुग्गुल सबसे अच्छा माना जाता है। इसको हिन्दी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ में गुग्गुल, तेलगू में महिषाक्षी और अंग्रेजी में इण्डियन बेदेलियम आदि नामों से जाना जाता है। गुग्गल काले और लाल रंग का होता है। इसका स्वाद कड़ुवा होता है।

गर्भाशय के रोगों में कारगर होता है गुग्गल

गुग्गल कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करता है। यह तीन महीने में 30% तक कॉलेस्ट्रॉल घटा सकता है। गुग्गल का सेवन सुबह-शाम गुड़ के साथ करने से कईं प्रकार के गर्भाशय के रोग ठीक हो जाते हैं। अगर रोग बहुत जटिल है तो 4 से 6 घंटे के अन्तर से इसका सेवन करते रहना चाहिए।

आयुर्वेदिक मेडिसिन के रूप में गुग्गल के गुण

वीर्यदोष नाशक, वीर्य बढ़ाने वाला व बल पुष्टिकारक होता है। यह मैथुन शक्ति बढ़ाता है। अमृतम गुग्गल त्रिदोष नाशक, वात, पित्त व कफ को जीतने वाला होता है। प्रमेह, मधुमेह, पथरी, कुष्ठ, आमवात, ग्रंथिशोथ, थायरॉइड, सूजन, कृमिरोग, नष्ट करने वाला होता है। यही कारण है कि आयुर्वेदिक मेडिसिन में सालों से इस दवा का प्रयोग किया जाता है।

गुग्गल के आयुर्वेदिक लाभ

आयुर्वेद के ऐसे हजारो ग्रंथ जिनमें गुग्गल के गुण, कुल, जाति, भेद, मात्रा, रोग, प्रयोग, उपयोग, उपभोग, सेवन विधि का वर्णन किया गया है। इसके अलावा इन ग्रंथों में गुग्गल से बनने वाली हर्बल दवाएं, 135 प्रकार के गुग्गल की निर्माण प्रक्रिया आदि तथा पहचान, मिलने का स्थान, गुग्गल की खेती, गुग्गल का शुद्धिकरण, आदि बातों को भी सारगर्भित किया गया है। महायोगराज गुग्गल, सिंहनाद गुग्गल, कैशोर गुग्गल, त्रिफला गुग्गल, त्रियोदशांग गुग्गलआदि गुग्गल के प्रकारों का भी इनमें वर्णन है।

कॉन्स्टिपेशन को दूर करने में भी सहायक होता है गुग्गल

गुग्गल कफ, वात, कृमि और अर्श नाशक होता है। इसलिए पाइल्स की समस्या या कॉस्टिपेशन की परेशानी में भी ये बहुत मददगार होता है। यह पाइल्स के गुदा के मस्सों को सुखा देता है तथा पुनः नहीं होने देता इसके अलावा इसमें सूजन और जलन को कम करने के गुण भी होते हैं। बार-बार होने वाला पेट खराब, अक्सर कॉन्स्टिपेशन होने के कारण आई कमज़ोरी व आलस्य मिटाता है।

तो इस तरह आप भी इस चमत्कारिक आयुर्वेदिक मेडिसिन को प्रयोग करके ज़रुर देखिये। लेकिन इसके लिए किसी कुशल वैध से सलाह लेना न भूलें।

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