पिम्पल से आज़ादी चाहते हैं तो अपनाइए होम्योपैथी उपचार

by | Aug 28, 2019 | Homeopathy, Therapy | 0 comments

थेरेपी में इन दिनों काफी बदलाव देखने में आ रहे हैं। ये बात हर तरह की चिकित्सा पद्धति पर लागू होती है। हर थेरेपी में अपनी तरह से उपचार करने के कुछ तरीके होते हैं। अब आप पिम्पल के उपचार की बात ही ले लीजिये। क्या आप इन्हें दूर करने के लिए प्रयास नहीं करते हैंॽ वैसे तो मुंहासे ज़्यादातर जवानी में ही देखे जाते हैं। कुछ लोग मुंहासों को शरीर की सामान्य अवस्था समझकर इसकी ओर ध्यान नहीं देते हैं। यह सभी शरीर में उपस्थित हॉर्मोन्स की उत्तेजक प्रक्रिया की वजह से होता है। पिम्पल ट्रीटमेंट के लिए आप क्या प्रयास नहीं करते। लेकिन हम आपको बता दें कि होम्योपैथी ट्रीटमेंट से भी आपके मुंहासे ठीक हो सकते हैं। आइये इस बारे में विस्तार से जानें।

क्या होने हैं पिम्पलॽ

मुंहासे जिसे ‘पिम्पल’ या मेडिकल भाषा में एक्ने के नाम से भी जाना जाता है। शरीर की त्वचा के अंदर अनगिनत ग्रंथियां एक प्रकार का स्त्राव पैदा करती हैं। जब इस स्त्राव का त्वचा पर आना किसी कारणवश बंद हो जाता है तो इन ग्रंथियों में सूजन आती है। यह ग्रंथियां अधिकतर चेहरे को ही प्रभावित करती हैं। इन ग्रंथियों में सूजन की वजह से मवाद भी निकलने लगता है। मुंहासे शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं। किन्तु चेहरा, कंधे तथा पीठ ज़्यादा प्रभावित होते हैं। चेहरे पर मुंहासे ज़्यादा होते हैं क्योंकि चेहरे की त्वचा पर इन ग्रंथियों की संख्या बहुत ज़्यादा होती है। इसलिए अपने चेहरे की देखभाल करना भी बहुत ज़रूरी है।

कब होते हैं पिम्पलॽ

यह समस्या विभिन्न अवस्थाओं में होती है। यह देखा गया है कि उम्र की तुलना में लड़कियों को लड़कों की तुलना में मुंहासे पहले होते हैं। लड़कियों में चौदह से सत्रह एवं लड़कों में सोलह से उन्नीस वर्ष की अवस्था में ज़्यादा पिम्पल होते हैं। यह ज़रूरी नहीं है कि मुंहासे जवानी के समय में ही हों। छोटे बच्चों एवं प्रौढ़ महिलाओं में भी यह देखे जा सकते हैं।

जानिए मुंहासे होने के कारण

1. मुंहासे अनुवांशिक कारणों से भी हो सकते हैं।
2. चेहरे, छाती, कंधे पर मुंहासों का कारण यह भी है कि इन भागों पर तैलीय ग्रंथियां एक्टिव होती हैं।
3. हॉर्मोन्स के स्त्राव की गड़बड़ी की वजह से मुंहासे ज़्यादा बनते हैं।
4. भोज्य पदार्थों में ज़्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, वसा, तैलीय एवं चटपटी वस्तुओं का सेवन मुंहासों का कारण होता है।
5. ओरल गर्भ निरोधक गोलियां एवं गर्भधारण के दौरान भी मुंहासे ज़्यादा होते हैं।
6. कॉस्मेटिक्स का प्रयोग करने से भी मुंहासे उग्र रूप धारण कर लेते हैं।

ऐसे करें पिम्पल ट्रीटमेंट

चिकित्सा के इस भाग में कुछ बातों को ध्यान रखकर पिम्पल ट्रीटमेंट किया जा सकता है।

1. त्वचा को स्वच्छ रखा जाए।
2. तली हुई तथा चटपटी वस्तुओं के सेवन से बचा जाए।
3. आयोडाइट्स, बोमाइट्स, एस्प्रीन युक्त औषधियों का सेवन कम किया जाए।
4. शरीर के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। यह भी पिम्पल ट्रीटमेंट का महत्वपूर्ण भाग है।
5. हरी सब्जियों का उपयोग अधिक किया जाए। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पिया जाये।

पिम्पल ट्रीटमेंट के लिए आप किसी विशेषज्ञ की सलाह भी ले सकते हैं।

होम्योपैथी ट्रीटमेंट से संभव है मुंहासों का इलाज

जी हां होम्योपैथी ट्रीटमेंट मुंहासों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस चिकित्सा द्वारा मुंहासे पूर्णतया ठीक हो जाते हैं। बशर्ते इन्हें सही समय पर औषधि एवं उपचार मिल जाए। होम्योपैथी ट्रीटमेंट पूर्णतः लक्षणों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। इसमें निम्नलिखित औषधियों का सेवन लक्षणों के आधार पर किया जाता है:-

• बरबेरिस इक्वा फोलियम क्यू.
• ग्रेफाइट्स
• बेलिस पेरेनिस
• काली ब्रोम (यह इस रोग की अचूक औषधि है।)
• नक्सजुगलेम्स
• पल्सेटिवा
• रसटाक्स
• साइलितीया
• हाइड्रोकोटाइल
• केलसल्फ
• रेडियम ब्रोम
• एक्टेरिजस रब
• सल्फर आदि।

तो आप भी पिम्पल दूर करने के लिए होम्योपैथी ट्रीटमेंट को ज़रूर अपनाएं। पिम्पल्स दूर करने के होम्योपैथी उपचार पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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