नींद की बीमारी (इंसोम्निया) में उपयोगी है मेलाटोनिन

by | Mar 18, 2020 | Self Care, Wellness | 0 comments

आपकी वेलनेस का सबसे अच्छा सोर्स है आपकी नींद। लेकिन लोग इसके महत्व को समझते नहीं हैं। छोटी-छोटी परेशानियों के लिए आप बहुत-से सप्लीमेंट्स का प्रयोग करते हैं। बल्कि समय आने पर दूसरों को भी सलाह दे देते हैं। अब जैसे नींद न आने की समस्या मतलब इनसोम्निया को ही ले लीजिये। इसे दूर करने के लिए भी आप मेलाटोनिन का सहारा ले सकते हैं। जी हां मेलाटोनिन सप्लिमेंट को बहुत अधिक प्रयोग किया जाता है। लेकिन लोग इसके दुष्प्रभाव से अंजान रहते हैं। इसलिए मेलाटोनिन साइड इफेक्ट्स को भी अनदेखा कर देते हैं। आइये इस बारे में आपको और जानकारी दें।

बढ़ रही है लोगों में इनसोम्निया की समस्या

जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल में परिवर्तन आ रहे हैं इनसोम्निया की समस्या बढ़ रही है। इनसोम्निया न केवल बड़े लोगों बल्कि बच्चों को भी नुकसान पहुंचा रही है। इसलिए इनसोम्निया की परेशानी को हल करने के लिए कृत्रिम साधनों का सहारा भी लिया जा रहा है।

इनसोम्निया के लिए मेलाटोनिन के सेवन का तरीका

मेलाटोनिन का बिना वजह या बिना डॉक्टर की सलाह सेवन करना गलत असर डाल सकता है। कई बार इसकी लत भी लग सकती है। खासकर आप इनसोम्निया के शिकार हैं तो। यही कारण है कि डॉक्टर एक निश्चित समय के लिए इसके सेवन की सलाह देते हैं। इसके सेवन के लिए कई अन्य हिदायतें भी दी जाती हैं। उदाहरण के लिए सोने के कितने समय पहले इसका सेवन करना है, जेट लेग की स्थिति में कितने दिन पहले इसका सेवन करना या नाइट शिफ्ट करने वालों को यह सप्लीमेंट किस समय लेना है, आदि।

क्या है मेलाटोनिन?

मूलतः मेलाटोनिन एक हॉर्मोन है जो दिमाग में बनता है। प्राकृतिक तौर से बनने वाला यह रसायन नींद के चक्र को नियंत्रित करने का काम करता है। किसी भी व्यक्ति के मेलाटोनिन का स्तर सूरज के अस्त होते ही शुरू हो जाता है। रात के समय यह उच्चतम होता है। सुबह-सुबह यह स्तर कम हो जाता है जिससे आपको उठने में मदद मिलती है। यह एक नैसर्गिक प्रक्रिया है। रात में बढ़ने और दिन में इसके स्तर के गिर जाने के कारण इसे एक नाम और भी दिया जाता है-‘ड्रैक्युला ऑफ हार्मोन्स।’

बीमारियों में मेलाटोनिन सप्लीमेंट होता है उपयोगी

यदि आपकी नींद का चक्र संतुलित होता है तो आपको किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं होती। मतलब आपको मेलाटोनिन सप्लीमेंट की भी कोई ज़रूरत नहीं। लेकिन कुछ बीमारियों या विशेष स्थितियों में नींद के चक्र को संतुलित करने के लिए डॉक्टर मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स के सेवन की सलाह दे सकते हैं। इन बीमारियों में मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स से बहुत ज़्यादा फर्क पड़ता है।

• इन्सोम्निया
• नेत्रहीन लोगों में सर्केडियन रिदम डिसऑर्डर्स
• जेट लेग्स
• डिलेड स्लीप डिसॉर्डर (जब नींद का सामान्य पैटर्न गड़बड़ा जाता है)
• शिफ्ट में काम करने वालों के लिए
• किसी प्रकार की विकलांगता से ग्रसित बच्चों के लिए जिनके सोने-जागने के चक्र में असंतुलन हो

मेलाटोनिन साइड इफेक्ट्स कर सकते हैं परेशान

जी हां इस सप्लीमेंट साइड इफेक्ट्स भी जानना आपके लिए ज़रूरी है। यदि इसका सेवन गलत समय पर किया तो भी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। मेलाटोनिन साइड इफेक्ट्स में शामिल हैं-

• नॉशिया
• चक्कर आना
• सिरदर्द
• उनींदापन
• चिड़चिड़ाहट

तो आप मेलाटोनिन साइड इफेक्ट्स के प्रकट होते ही डॉक्टर से सम्पर्क करें।

न लें अगर आप हैं:

• गर्भवती
• स्तनपान करवाने वाली
• किसी ऑटोइम्यून डिसॉर्डर के शिकार
• सीजर (दौरे पड़ना) डिसॉर्डर के शिकार
• डिप्रेशन के पीड़ित

नींद के लिए कुछ सामान्य उपाय:

• योग और ध्यान का उपयोग
• नियमित एक ही समय पर सोना
• सोने से पहले सारे गैजेट्स और स्क्रीन को बंद कर देना
• सोने से पहले नहाना या गुनगुने पानी से हाथ-पैर धोना
• धीमे संगीत को सुनना, आदि

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